भोपाल। ट्रेन निरस्त होने के बाद टिकट की पूरी राशि में से 2110 रुपया वापस नहीं करना रेलवे और आइआरसीटीसी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए दोनों पर 20 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। इसके साथ ही टिकट की बकाया रकम भी सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से देने का आदेश हुआ है।
दरअसल कोलार निवासी भवानी शंकर ठाकुर ने अपने परिवार के साथ आगरा से भोपाल आने के लिए 24 सितंबर 2023 की निजामुद्दीन-रानी कमलापति सुपरफास्ट एक्सप्रेस का टिकट बुक कराया था। इसके लिए उन्होंने 4,160 रुपये का भुगतान किया था। 9 सितंबर 2023 को रेलवे की ओर से ट्रेन निरस्त होने का संदेश मिला। इसके बाद उन्होंने 10 सितंबर को परिवार के लिए केरल एक्सप्रेस में दूसरा टिकट बुक करा लिया।
10 महीने बाद मिला आधा रिफंड, उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला
पुराने टिकट की राशि वापस लेने के लिए यात्री ने रेलवे और आइआरसीटीसी से संपर्क किया। हालांकि करीब 10 माह बाद केवल 2,050 रुपये वापस किए गए। शेष 2,110 रुपये नहीं लौटाए जाने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।
सुनवाई के दौरान रेलवे ने तर्क दिया कि टिकट की बुकिंग और निरस्तीकरण आइआरसीटीसी के माध्यम से हुआ था। इसलिए रिफंड की जिम्मेदारी आइआरसीटीसी की है। इसके लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं है। वहीं आइआरसीटीसी ने कहा कि उसकी जिम्मेदारी अपनी वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुकिंग और निरस्तीकरण के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने तक सीमित है। टिकट बुक होने के बाद किराए की राशि रेलवे को हस्तांतरित कर दी जाती है। ट्रेन के संचालन या परिचालन में बदलाव से उसका कोई संबंध नहीं है। ट्रेन निरस्त होने या दोबारा चलने की सूचना भी रेलवे की ओर से दी जाती है।
आयोग ने दोनों को माना जिम्मेदार: 7% ब्याज के साथ राशि लौटाने का आदेश
आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल, सदस्य अंजुम फिरोज और प्रीति मुद्गल की बेंच ने रेलवे और आइआरसीटीसी दोनों को 2,110 रुपये की शेष टिकट राशि, 20 अगस्त 2023 से सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया। इसके अलावा 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति राशि देने के निर्देश दिए हैं। इस तरह कुल 22,110 रुपये की राशि और ब्याज का भुगतान करना होगा।