झुंझुनूं: राजस्थान में एक सेवानिवृत्त महिला लेक्चरर को अदालत के आदेश के बावजूद 25 वर्षों तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित कॉलेज को निर्देश दिए हैं कि सिविल कोर्ट द्वारा तय की गई राशि का भुगतान एक माह के भीतर किया जाए, अन्यथा बढ़ी हुई ब्याज दर के साथ भुगतान करना होगा। पिछले पच्ची साल से कॉलेज महिला लेक्चरर शकुंतला पाटनी को बकाया देने से टालमटोल करते हुए धोखा दे रहा था। अब हाईकोर्ट के दखल के बाद पाटनी ने राहत की सांस ली है।
सिविल कोर्ट के आदेश की अनदेखी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता शकुंतला पाटनी की याचिका पर फैसला सुनाया। याचिका में बताया गया कि 12 जून 2000 को ट्रिब्यूनल ने लेक्चरर को पुनः सेवा में लेने और सभी परिलाभ देने के आदेश दिए थे। इसके बाद सिविल कोर्ट ने 15 लाख 57 हजार 937 रुपये की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया, लेकिन अब तक यह राशि अदा नहीं की गई।
न्याय में देरी पर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने इस स्थिति को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि समय पर न्याय न मिलना, न्याय न मिलने के बराबर है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के सभी सेवानिवृत्त लाभों की गणना 30 जून 2026 तक कर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
एक माह में भुगतान के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और इंदिरा गांधी बालिका निकेतन कॉलेज, चिड़ावा को आदेश दिए हैं कि वे सिविल कोर्ट की ओर से निर्धारित राशि का भुगतान एक माह के भीतर करें। तय समय में भुगतान नहीं होने की स्थिति में बकाया राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।