बिलासपुर में फीस, पढ़ाई CBSE की, एग्जाम CG बोर्ड का:हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव से जवाब मांगा

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित ब्रिलियंट पब्लिक और नारायणा टेक्नो स्कूल में CBSE कोर्स की पढ़ाई कराने के बाद स्टूडेंट्स को सीजी बोर्ड का एग्जाम दिलाया गया। इसे लेकर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने नाराजगी जाहिर की है। हाईकोर्ट ने मामले में शिक्षा सचिव को शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है। केस की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी।

दरअसल, राज्य सरकार ने इस बार 5वीं और 8वीं के एग्जाम बोर्ड स्तर पर आयोजित करने का आदेश जारी किया। ऐसे में वो प्राइवेट स्कूल जिन्हें CBSE की मान्यता नहीं है, उनके बच्चों को पांचवीं और आठवीं कक्षा में सीजी बोर्ड का एग्जाम देना पड़ा। जबकि स्कूल प्रबंधन ने इन बच्चों के लिए लोकल एग्जाम पहले ही आयोजित कर लिया था। ऐसे में पेरेंट्स ने कलेक्टर बंगला का भी घेराव किया था।

दोबारा एग्जाम लेने पर भड़के पेरेंट्स

शासन के आदेश का हवाला देकर ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायाणा टेक्नो स्कूल प्रबंधन ने भी पांचवीं और आठवीं के बच्चों को दोबारा सीजी बोर्ड एग्जाम दिलाने कहा। यह सुनकर स्टूडेंट्स के पेरेंट्स भड़क गए, उनका कहना था कि उनसे CBSE मान्यता के नाम पर एक्स्ट्रा फीस ली गई है। जब बच्चों को सीजी बोर्ड का एग्जाम देना था तो वो ऐसे महंगे स्कूल में दाखिला क्यों दिलाते।

इसके विरोध में पेरेंट्स ने स्कूल और कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इसके साथ ही कलेक्टर बंगला घेरा, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं निकला। स्कूल प्रबंधन की मनमानी का खामियाजा स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ा और उन्हें मजबूरी में सीजी बोर्ड का एग्जाम देना पड़ा।

जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

हाईकोर्ट में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूल में प्रवेश नहीं देने को लेकर जनहित याचिका की सुनवाई चल रही है। इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच को बताया गया कि प्रदेश में स्कूल प्रबंधन की मनमानी चल रही है।

वकीलों ने ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायाणा टेक्नो स्कूल की जानकारी दी। साथ ही बताया कि पेरेंट्स को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा।

सालभर CBSE की पढ़ाई करते रहे स्टूडेंट्स

कोर्ट को बताया गया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से इन स्टूडेंट्स को सालभर तक CBSE कोर्स की पढ़ाई कराई गई। पेरेंट्स एक साल तक उसकी तैयारी भी कराते रहे। स्कूल प्रबंधन ने फरवरी में लोकल स्तर पर एग्जाम भी ले लिया।

लेकिन बाद में स्कूल प्रबंधन को जब पता चला कि राज्य सरकार पांचवीं-आठवीं कक्षा का बोर्ड एग्जाम ले रहा है, तब स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को सीजी बोर्ड एग्जाम दिलाने के लिए दबाव बनाया।

हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव से शपथपत्र के साथ मांगा जवाब

इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से बताया कि CBSE ने अपने मान्यता के नियम को सख्त कर दिया है। इसके तहत CBSE उन स्कूलों को ही मान्यता देगा, जहां 12वीं कक्षा तक स्कूल संचालित है। जिन प्राइवेट स्कूलों को CBSE से मान्यता नहीं है, वो राज्य शासन के नियम और निर्देशों के तहत संचालित है।

इस पर डिवीजन बेंच ने शिक्षा सचिव को शपथपत्र के साथ इस मामले में जवाब पेश करने के लिए कहा है।

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