भोपाल। जिला पंचायत के 475 गांवों में भीषण गर्मी के दौरान पेयजल संकट खड़ा होने लगा है, लेकिन पीएचई और जल निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने गांवों में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई है। यही कारण है कि इन गांवों में पीने के पानी के लिए हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इन गांवों में 121 नलजल योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और जहां योजना संचालित हो रही हैं, वहां 17 हजार से अधिक परिवारों को कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। वहीं जिले में तीन हजार से अधिक हैंडपंप का भी जलस्तर कम होने लगा है। जिन 300 से अधिक गांवों में पानी की किल्लत हो रही है, वहां अधिकतर हैंडपंपों में बीस फीट तक पाइप बढ़ाए गए हैं।जानकारी के अनुसार 475 गांवों में 98 हजार 128 परिवार रहते हैं, जिनमें पेयजल आपूर्ति करने की जिम्मेदारी पीएचई और जल निगम को दी गई है। इन परिवारों में से 17 हजार 555 परिवार ऐसे हैं, जिनको अब तक नल कनेक्शन तक नहीं दिए गए हैं। जबकि 261 गांवों में नलजल योजना से पानी दिया जा रहा है, जिसमें 86 योजनाएं बंद पड़ी हैं और 121 नलजल योजनाएं अब तक अधूरी पड़ी हैं।
निजी ट्यूबवेलों का सहारा और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति
ग्राम पंचायत कनेरा में नलजल योजना अधूरी पड़ी होने की वजह से गांव के लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन जाट ने अपने निजी ट्यूबवेल से 100 से ज्यादा घरों में पाइप से कनेक्शन दिए हैं, जिससे इन परिवारों को पानी मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि पानी की किल्लत को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में दो दर्जन निजी ट्यूबवेलों का अधिग्रहण किया जाएगा।
तीन हजार हैंडपंप से जलापूर्ति: गांवों में पानी की आपूर्ति अब हैंडपंपों पर निर्भर हो गई है, जबकि कुछ गांवों में निजी ट्यूबवेलों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। करीब चार हजार 92 हैंडपंप में से तीन हजार 828 पानी दे रहे हैं। इनका जलस्तर गिरने की वजह से पाइप बढ़ाकर काम चलाना पड़ रहा है, जबकि 264 हैंडपंप पूरी तरह से बंद हो गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर गांवों में नलजल योजना से जलापूर्ति की जा रही है। जहां दिक्कत हो रही है वहां ग्रामीण हैंडपंपों से पानी ले रहे हैं। कुछ पंचायतों में नलजल योजना का संचालन किया जा रहा है।
– सुदेश मालवीय, कार्यपालन यंत्री, पीएचई