जितनी पढ़ी-लिखी महिला उतना छोटा परिवार… एमपी में अशिक्षित महिलाओं के 3 से ज्यादा, तो ग्रेजुएट के सिर्फ 2 बच्चे

भोपाल। आमतौर पर यह धारणा रहती है कि पढ़े-लिखे और शहरी लोग छोटा परिवार पसंद करते हैं। जनगणना निदेशालय की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 से यह सिद्ध भी हो रहा है। मध्य प्रदेश की बात करें तो अशिक्षित महिलाओं में प्रजनन दर 3.6 है तो कक्षा 12वीं और स्नातक से ऊपर में 2.1 है। कहने का तात्पर्य यह है कि एक अशिक्षित महिला औसतन तीन या तीन से अधिक बच्चों को जन्म दे रही है, तो स्नातक वाली दो बच्चों को जन्म दे रही हैं।

बिना औपचारिक शिक्षा या साक्षर महिलाओं में यह दर 2.9, प्राथमिक शिक्षित में 2.7, मिडिल में 2.4, 10वीं तक शिक्षित में 2.3 है। इससे साफ है कि शिक्षा का स्तर जैसे-जैसे बढ़ता है परिवार छोटा होता जाता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर सर्वाधिक सामान्य प्रजनन दर (जीएफआर) की बात करें तो हमारा प्रदेश बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बाद चौथे स्थान पर है। 15 से 49 वर्ष की प्रति हजार महिलाओं से एक वर्ष में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या इसमें शामिल की जाती है जो प्रदेश की 70 है।बिहार की 86, उत्तर प्रदेश की 78 और झारखंड की 72 है। देश की औसत जीएफआर 63 है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शून्य से चार वर्ष की उम्र के बच्चों का कुल आबादी में प्रतिशत देश में सर्वाधिक मध्य प्रदेश में है। कुल लोगों में से 9.4 प्रतिशत इसी आयु समूह के हैं। ग्रामीण क्षेत्र में यह 10 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 7.8 प्रतिशत है। इसी तरह से शून्य से 14 आयु वर्ग वाले भी बिहार (31.5 प्रतिशत) के बाद मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 27.3 प्रतिशत हैं। यह भी कह सकते हैं कि एक चौथाई आबादी इसी आयु वर्ग की है। यानी, भविष्य में मध्य प्रदेश युवा राज्य के रूप में पहले या दूसरे स्थान पर रहेगा।


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