हाईकोर्ट के फैसले से भिलाई निगम को बड़ी राहत, भूखंड नीलामी रद्द करने का निर्णय बरकरार

भिलाईनगर। आवासीय भूखंडों की नीलामी रद्द करने के भिलाई नगर निगम के फैसले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के इस निर्णय सेनिगम को बड़ी राहत मिली है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल सबसे ऊंची बोली लगाने से किसी व्यक्ति को भूखंड पर कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।जब तक सक्षम अधिकारी बोली को स्वीकार नहीं करता, तब तक कोई अनुबंध अस्तित्व में नहीं आता।

मामला भिलाई नगर निगम की ई-नीलामी से जुड़ा है। भिलाई निवासी रश्मि अग्रवाल ने भूखंड क्रमांक-10 के लिए सबसे अधिक बोली लगाई थी। बाद में कलेक्टर द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के बाद निगम ने पाया कि कुछ भूखंडों की बोली सरकारी दर से कम है।

जनहित और सार्वजनिक राजस्व को ध्यान में रखते हुए निगम ने नीलामी प्रक्रिया रद्द कर दी थी और सभी संबंधितों की बयाना राशि वापस कर नई नीलामी कराने का निर्णय लिया था। इसके खिलाफ रश्मि अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पट्टा जारी करने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निगम का निर्णय सभी भूखंडों के लिए समान रूप से लागू किया गया था। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव या दुर्भावना नहीं दिखाई देती। कोर्ट ने यह भी माना कि निविदा की शर्तों में आयुक्त को बिना कारण बताए बोली अस्वीकार करने का अधिकार दिया गया था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत न्यायालय राज्य या स्थानीय निकाय को ऐसा अनुबंध करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता, जो सार्वजनिक हित के विपरीत हो। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद निगम की नीलामी प्रक्रिया रद्द करने की कार्रवाई को कानूनी मजबूती मिली है।

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