इस्लामाबाद/बीजिंग: चीन की कड़ी चेतावनी के बाद पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में सीपीईसी प्रोजेक्ट की सुरक्षा में पूरी ताकत झोंक दी है। पाकिस्तान ने बुधवार को कहा है कि वो बलूचिस्तान में चीनी खदानों की सुरक्षा और सख्त करेगी। बलूच लिबरेशन आर्मी की धमकी के बाद चीन की तरफ से चलाई जा रही तांबे और सोने की खदान की सुरक्षा और कड़ी करने की बात पाकिस्तान ने कही है। पाकिस्तान ने ये फैसला तब लिया है जब बलूचों के लगातार भीषण हमलों के बाद चीनी कंपनी सैनडक मेटल्स लिमिटेड ने बलूचिस्तान में खदान बंद करने का फैसला किया।
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक सैनडक मेटल्स लिमिटेड ने बलूचिस्तान में प्रोजेक्ट बंद करने का फैसला किया है। हालांकि अब सैनडक मेटल्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर राजिक संजरानी ने खदान बंद होने की उस रिपोर्ट को गलत बताया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि यह खदान 25 सालों से बिना किसी रुकावट के चल रही है और ‘इसके बंद होने की कोई संभावना नहीं है।’ लेकिन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीनी कंपनियों में बलूचों के हमलों को लेकर काफी डर है।
चीन की धमकी के बाद घुटनों पर पाकिस्तान
बलूचों के लगातार होने वाले हमलों के बीच चीन पहले ही सीपीईसी से जुड़े कई प्रोजेक्ट पर काम बंद कर चुका है। वहीं चीन ने धमकी दे रखी है कि अगर और हमले होते हैं तो वो सीपीईसी के लिए और फंड जारी नहीं करेगा। इसके अलावा उसने चीनी इंजीनियरों की सुरक्षा के लिए अपने सैनिकों को भेजने की बात कही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने बलूचिस्तान में खदान तक जाने वाले कई रास्तों का इस्तेमाल नहीं करने की बात कही है। उन्हें ज्यादातर रास्तों पर बलूचों के हमलों का डर सताता है।
ट्रांसपोर्टर्स के डर पर पाकिस्तान ने क्या कहा?
पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने ट्रांसपोर्टर्स के खदान साइट तक जाने से इनकार करने के बाद कहा कि इस्लामाबाद को जुलाई की शुरुआत में ही खदान ऑपरेटर की सुरक्षा संबंधी चिंताएं मिल गई थीं और उसने एजेंसियों को खदान के ठिकानों, कर्मचारियों और सामान के आस-पास सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया था। चौधरी ने रॉयटर्स को बताया ‘हमने प्रांतीय अधिकारियों और सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे अपने सभी ठिकानों, कर्मचारियों, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करें।’
बलूचिस्तान में चीन का CPEC खतरे में कैसे है?
चीन बलूचिस्तान के अंदर कई प्रोजेक्ट्स चला रहा है। इसकी सीमा अफगानिस्तान और ईरान से लगती है। बलूच फ्रीडम फाइटर्स दशकों से एक अलग देश की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पाकिस्तान और उसके विदेशी सहयोगियों ने स्थानीय समुदायों को दरकिनार करते हुए इस प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण किया है।
‘फाइनेंशियल टाइम्स’ ने बुधवार को रिपोर्ट दी कि सैनडक के मैनेजिंग डायरेक्टर ने पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय को चेतावनी दी थी कि खराब सुरक्षा हालात के कारण सप्लाई रूट में रुकावट आ रही है जिससे एक महीने के भीतर कामकाज चलाना मुश्किल हो सकता है। सैनडक खदान का संचालन सरकारी कंपनी ‘मेटालर्जिकल कॉरपोरेशन ऑफ चाइना’ करती है। इसका लीज 2022 में बढ़ाया गया था और यह अपने उत्पादन का ज्यादातर हिस्सा चीन को निर्यात करती है।
बलूचिस्तान में अशांति के कारण बैरिक माइनिंग के 9 अरब डॉलर के रेको डिक गोल्ड और कॉपर प्रोजेक्ट पर भी अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। यह प्रोजेक्ट सैनडक से करीब 50 किलोमीटर दूर है।