नई दिल्ली: इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है। कई लोगों की शिकायत है कि E20 से गाड़ियों के इंजन को नुकसान हो रहा है और माइलेज प्रभावित हो रहा है। इस बीच सरकार अब इथेनॉल को आपके किचन तक पहुंचाने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री इथेनॉल को खाना पकाने के मुख्य ईंधन के तौर पर लाने के लिए एक पॉलिसी फ्रेमवर्क पर काम कर रही है। इससे विदेशी मुद्रा की भारी बचत हो सकती है।
क्या होगा फायदा?
एक अधिकारी ने बताया कि खाना पकाने के लिए एक वैकल्पिक स्वच्छ ईंधन पॉलिसी पर काम चल रहा है। इससे घरों में खाना पकाने के ईंधन के तौर पर एलपीजी के साथ-साथ इथेनॉल को भी अपनाया जा सकेगा। यह पॉलिसी सितंबर तक तैयार हो सकती है। खबर लिखे जाने तक मिनिस्ट्री को भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला था।अप्रैल में रिपोर्ट आई थी कि सरकार के कहने पर इथेनॉल-बेस्ड कुकिंग स्टोव का परीक्षण किया जा रहा था ताकि घरों में खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का विकल्प मिल सके। खाना पकाने के ईंधन के तौर पर इथेनॉल का इस्तेमाल करने से भारत को एलपीजी पर अपनी निर्भरता कम करने और बढ़ते ईंधन बिल को बचाने में मदद मिलेगी।
कितना है भारत की कैपेसिटी?
इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि एलपीजी के विकल्प के तौर पर इथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए सरकार कोई सब्सिडी स्कीम भी शुरू कर सकती है। यह स्कीम या तो कैपिटल-बेस्ड हो सकती है या फिर लगातार चलने वाली वित्तीय मदद हो सकती है। भारत में इथेनॉल की सप्लाई बहुत ज्यादा है।
सरकार के E20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए सालाना खपत करीब 11 बिलियन लीटर है। शराब बनाने वाली कंपनियों, दवा कंपनियों और केमिकल कंपनियों की सालाना खपत करीब 3-3.5 बिलियन लीटर। इसके बाद करीब 7 बिलियन लीटर की क्षमता बच जाती है। इसे नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों को एक्सपोर्ट करने पर भी विचार किया जा सकता है।
इथेनॉल एटीएम
इन देशों में 10% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य है, लेकिन उनके पास पर्याप्त फीडस्टॉक और डिस्टिलिंग क्षमता नहीं है। कहा जा रहा है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां भी इस मामले पर काम कर रही हैं। उन्होंने इथेनॉल-बेस्ड स्टोव पर रिसर्च और डेवलपमेंट किया है और वे इथेनॉल से खाना पकाने की मौजूदा टेक्नोलॉजी के लिए पार्टनरशिप या उन्हें खरीदने के तरीकों पर भी विचार कर रही हैं।
कितनी होगी बचत?
इंडस्ट्री के एक और अधिकारी ने कहा कि ईरान युद्ध का भारत की एलपीजी सप्लाई पर क्या असर पड़ा। एलपीजी के विकल्प के तौर पर अतिरिक्त इथेनॉल क्षमता का इस्तेमाल करना और फ्यूल का इंपोर्ट कम करना एक अच्छा ऑप्शन है। भारत अपने एलपीजी सोर्सिंग में विविधता लाया है, फिर भी हम एलपीजी इंपोर्ट के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है।
फरवरी में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ई-कुकिंग और बायोगैस अपनाने से भारत 2050 तक एलपीजी सब्सिडी पर कुल मिलाकर 2 लाख करोड़ रुपये (24 अरब डॉलर) से ज्यादा की बचत कर सकता है।