भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ने के कारण खरीफ फसलों पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। 5 अगस्त तक प्रदेश भर में औसतन 16.27 इंच बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक 19.97 इंच बारिश होनी चाहिए थी।
इस तरह राज्य में अब तक सामान्य से 19% कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की इस बेरुखी के चलते खेतों में खड़ी धान, सोयाबीन और मक्का की फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की गंभीर आशंका बन गई है।
पूर्वी मप्र में स्थिति चिंताजनक, 22% की गिरावट
प्रदेश के सबसे बड़े धान उत्पादक क्षेत्र यानी पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का अंतर सर्वाधिक देखा जा रहा है। यहाँ सामान्य 21.90 इंच वर्षा के मुकाबले अब तक महज 17.02 इंच बारिश ही दर्ज हुई है, जो कि 22% कम है।
वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी सामान्य से 15% कम पानी बरसा है। राजधानी भोपाल में 22.68 इंच के सामान्य आंकड़े के मुकाबले 21.87 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है।
खेतों में सूखने लगीं क्यारियाँ, ट्यूबवेल बने सहारा
पानी न मिलने के कारण धान की क्यारियाँ सूखने लगी हैं। राजधानी के कोलार क्षेत्र समेत कई इलाकों में खेतों की हालत बिगड़ने लगी है। बारिश का इंतजार लंबा होता देख कई किसानों ने ट्यूबवेल से खेतों में पानी भरकर बोवनी और फसलों की रोपाई शुरू की है।
सोयाबीन-मक्का का उत्पादन घटने का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में ‘ड्राई स्पेल’ (लंबे समय तक सूखा रहने) का फसलों की शारीरिक संरचना पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। पानी की कमी से धान में ‘टिलरिंग’ (पौधों के फुटाव) की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
वहीं, सोयाबीन में फूल और फलियां झड़ने की समस्या उत्पन्न हो जाती है और मक्का में दाना बनने की प्रक्रिया काफी कमजोर पड़ जाती है, जिससे इस बार उत्पादन में कमी आने के पूरे आसार हैं।