‘भारत के साथ नहीं चाहते बिगड़े दोस्‍ताना रिश्‍ते’, तीस्‍ता पर बांग्‍लादेश के बदले सुर, चीन को दे रहा प्रोजेक्‍ट

ढाका: बांग्‍लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत दौरे पर आनाकानी कर रहे हैं। तारिक रहमान ने पीएम बनने के बाद पहले चीन की यात्रा की और भारत की आपत्तियों के बाद भी तीस्‍ता नदी प्रोजेक्‍ट को लेकर बड़ा समझौता भी कर डाला। अब तारिक रहमान सरकार के सुर बदलते हुए दिख रहे हैं। बांग्‍लादेश के जल संसाधन मंत्री शहीदुद्दीन चौधरी अनी ने कहा है कि बांग्‍लादेश नहीं चाहता है कि तीस्‍ता नदी प्रबंधन को लेकर भारत के साथ दोस्‍ताना रिश्‍ते खराब हों। उन्‍होंने भारत से अपील की कि वह बांग्‍लादेश के हितों पर व‍िचार करे। अनी ने भारत को एक दोस्‍त देश करार देते हुए कहा, ‘एक म‍ित्र को दूसरे मित्र के हितों की भी रक्षा करनी चाहिए।’

अनी ने ढाका में एक सेमिनार में कहा, ‘पड़ोसी देश एक दोस्‍त देश होते हैं। उन्‍हें यह समझना चाहिए कि अगर उनके हित हैं तो हमारे भी हित हैं। एक मित्र को दूसरे मित्र के हितों की रक्षा करनी चाहिए। हम कभी नहीं चाहते हैं कि भारत के साथ दोस्‍ताना संबंध खराब हों।’ बांग्‍लादेश के मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब बांग्‍लादेश ने प्रयास तेज कर दिया है कि तीस्‍ता व‍िवाद को सुलझाया जाए जो काफी लंबे समय से चला आ रहा है। बांग्‍लादेश तीस्‍ता प्रोजेक्‍ट में चीन की मदद ले रहा है।

बांग्‍लादेश क्‍यों चाहता है तीस्‍ता प्रोजेक्‍ट?

तारिक रहमान सरकार चाहती है कि बार-बार आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए और उत्‍तरी बांग्‍लादेश में सूखे के दिनों में पानी की सप्‍लाई के लिए तीस्‍ता प्रोजेक्‍ट को आगे बढ़ाया जाए। अनी ने कहा कि सरकार ने तीस्‍ता प्रोजेक्‍ट को लेकर कई सेमिनार और सलाह व‍िशेषज्ञों के साथ किए हैं। एक विस्‍तृत अध्‍ययन के आधार पर सरकार अपने अगले कदम का फैसला करेगी। अनी ने कहा कि तीस्‍ता प्रोजेक्‍ट एक बड़ी चुनौती है। बांग्‍लादेश के 5 से 6 उत्‍तरी जिलों को इस प्रोजेक्‍ट से काफी ज्‍यादा उम्‍मीदें हैं।

अनी ने कहा कि बांग्‍लादेश के ये जिले कई साल से नदी के कारण होने वाले क्षरण से परेशान हैं। उन्‍होंने कहा, ‘अगर हम इसे क्रियान्वित करने में फेल होते हैं तो इस इलाके में रहने वाले लोगों की समस्‍याएं बनी रहेंगी और बढ़ती रहेंगी। हमें किसी भी तरह से इस चुनौती से निपटना होगा।’ बता दें कि तीस्‍ता नदी प्रोजेक्‍ट को लेकर भारत और बांग्‍लादेश के बीच दशकों से तनाव बना हुआ है। यह नदी हिमालय से निकलती है और सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल के रास्‍ते बांग्‍लादेश में पहुंचती है। बांग्‍लादेश पहुंचने से पहले यह ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है।

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