काठमांडू: नेपाल के गोरखा सैनिक दशकों से भारतीय सेना का हिस्सा रहे हैं। भारतीय सेना में गोरखा रेजिमेंट है और इसमें नेपाल दिलेर गोरखा सैनिकों की भर्ती होती रही है। अग्निपथ योजना आने के आने के बाद गोरखा सैनिकों की भर्ती रुकी हुई है। नेपाली अब भी भारतीय सेना में भर्ती होना चाहते हैं और इसको लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय सेना प्रमुख धीरज सेठ इस समय नेपाल पहुंचे हुए हैं। इस बीच नेपाल के पोखरा से गोरखा राइफल के रिटायर हुए सैनिकों का एक वीडियो सोशल मीडिया में जमकर शेयर किया जा रहा है। यह वीडियो नेपाल के पोखरा का बताया जा रहा है जहां पर रिटायर गोरखा सैनिकों ने भारत का झंडा लहराया और भारत का राष्ट्रगान जन गण मन भी गाया।
नेपाल के नागरिक होने के बाद भारतीय झंडे को सलामी देना सोशल मीडिया में काफी पसंद किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह वीडियो स्वतंत्रता दिवस का है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। नेपाल के भारतीय सेना के हिस्सा रहे गोरखा सैनिक भारती झंडे को सम्मान दे रहे हैं। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर कारगिल युद्ध लड़ चुके शौर्य चक्र से सम्मानित मेजर राकेश ने एक्स पर शेयर किया है। इस वीडियो की जमकर तारीफ की जा रही है। असल में साल 1947 में भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच एक त्रिपक्षीय संधि हुई थी। इसके बाद से नेपाली गोरखा सैनिक भारतीय सेना में शामिल होते रहे हैं।
भारतीय सेना प्रमुख धीरज सेठ को मानद रैंक
हाल ही में नेपाल के पोखरा में गोरखा जवानों ने भारतीय सेना में भर्ती के लिए प्रदर्शन किया है। भारतीय सेना प्रमुख और नेपाली सेना प्रमुख के बीच मुलाकात हुई है। माना जा रहा है कि इसमें गोरखा सैनिकों की भर्ती का मुद्दा भी उठा है। नेपाली अब अग्निपथ योजना के तहत भी भर्ती होने के लिए तैयार हैं। बता दें कि भारत और नेपाल के बीच दशकों पुरानी सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सोमवार को भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को नेपाली सेना के जनरल की मानद रैंक प्रदान की। जनरल धीरज सेठ को काठमांडू स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष अलंकरण समारोह में यह मानद रैंक प्रदान किया गया।दरअसल, जनरल धीरज सेठ को नेपाली सेना के जनरल की मानद रैंक प्रदान किया जाना केवल एक औपचारिक सम्मान नहीं है, बल्कि यह भारत और नेपाल के बीच कायम विशेष सैन्य संबंधों की एक अनूठी और वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। इस परंपरा के तहत, भारत और नेपाल एक-दूसरे के सेना प्रमुखों को अपने-अपने सैन्य जनरल की मानद रैंक प्रदान करते हैं। यह परंपरा दोनों सेनाओं के बीच कायम निकट संबंधों और सैन्य भाईचारे का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।
नेपाल और भारतीय सेना में दोस्ती मजबूत
भारतीय सेना के अनुसार, यह पारस्परिक सम्मान केवल समारोह तक सीमित नहीं है। यह दोनों सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, पेशेवर सम्मान और सैन्य सौहार्द की संस्थागत अभिव्यक्ति है। समय के साथ दोनों देशों में सैन्य नेतृत्व की कई पीढ़ियां बदलती रही हैं, लेकिन यह परंपरा लगातार कायम रही है। यही वजह है कि जनरल धीरज सेठ को प्रदान किया गया यह सम्मान परंपरा के साथ रणनीतिक निरंतरता का भी प्रतीक है। यह समारोह भारतीय सेना और नेपाली सेना की उस प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है, जिसके तहत दोनों सेनाएं अपने विशिष्ट और ऐतिहासिक सैन्य संबंधों को बनाए रखते हुए आपसी हित वाले क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।