इंटर्न को हर महीने 30 लाख का ऑफर! देसी कंपनियों ने तोड़ दिए सारे रेकॉर्ड

नई दिल्ली: भारत में हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) कंपनियां इंटर्न्स को रेकॉर्ड तोड़ पैसा ऑफर कर रही हैं। शेयर बाजार में सुस्ती और डेरिवेटिव्स के कड़े नियमों के बीच, ये कंपनियां गणित और डेटा के माहिर युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए भारी-भरकम सैलरी दे रही हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुड़गांव की कंपनी Quadeye इंटर्न्स को महीने के करीब 30 लाख रुपये ऑफर कर रही है। यानी दो महीने की इंटर्नशिप के लिए छात्र को 60 लाख रुपये मिलेंगे। यह रकम पिछले साल के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा है। वहीं, ग्रेविटॉन रिसर्च कैपिटल (Graviton Research Capital) दो महीने की इंटर्नशिप के लिए करीब 50 लाख रुपये दे रही है, जबकि पहले यह रकम 16 लाख रुपये के आसपास थी।

किसे मिल रहे ये ऑफर?

विदेशी ट्रेडिंग कंपनियां भी पीछे नहीं हैं। एम्सटर्डम की IMC ट्रेडिंग ने दो महीने की इंटर्नशिप का पैकेज दोगुना कर 50 लाख रुपये कर दिया है। Optiver नाम की कंपनी तो दो महीने के लिए करीब 60 लाख रुपये ऑफर कर रही है।

ये बड़े-बड़े पैकेज देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों (IIT) के छात्रों को दिए जा रहे हैं। कंपनियां ऐसे इंजीनियरों को ढूंढ रही हैं जो गणित के जटिल मॉडल बना सकें और ऐसे सिस्टम तैयार कर सकें जो पलक झपकते ही ट्रेडिंग कर सकें।

भर्ती करने वाली कंपनी एक्विस सर्च के पार्टनर डैनियल वाज कहते हैं कि विदेशी कंपनियां अब सीधे कॉलेज कैंपस से ही टैलेंट को उठाने के लिए बहुत ज्यादा पैसा खर्च कर रही हैं। उनके मुताबिक, कंपनियां अनुभवी लोगों को बाहर से लाने के बजाय नए इंजीनियरों को खुद ट्रेनिंग देकर तैयार करना ज्यादा पसंद कर रही हैं।

इतना पैसा क्यों दे रही हैं ये कंपनियां?

यह भर्ती अभियान ऐसे समय में चल रहा है जब भारत के डेरिवेटिव मार्केट में नियम कड़े हो गए हैं और कारोबार कम हुआ है। जुलाई में NSE पर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) का कारोबार 17 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। अगस्त की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में खत्म हुए साल में इन कंपनियों के मुनाफे में 3% की गिरावट देखी गई।

इसके बावजूद, भारतीय ट्रेडिंग कंपनियां अब दूसरे देशों के बाजारों में भी हाथ आजमा रही हैं। इसके लिए उन्हें काबिल इंजीनियरों की जरूरत है। डैनियल वाज का कहना है कि कंपनियों को मिड-लेवल की पोजीशन के लिए बाहर से अच्छे उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं, इसलिए वे शुरुआत से ही टैलेंट को मोटी सैलरी पर जोड़ रही हैं।

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