भोपाल, रीवा के गांधी स्मारक अस्पताल में 9 माह की गर्भवती कल्पना मिश्रा और उसके गर्भस्थ शिशु की इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत से कुछ घंटे पहले कल्पना प्रसूति वार्ड से बाहर आकर रोते हुए मां से खुद को बचाने की गुहार लगा रही थी। वह कह रही थी- ‘मां, मुझे बचा लो… मैं नहीं बचूंगी, ये मुझे मार डालेंगे।’
नर्सिंग स्टाफ उसे समझाकर वार्ड में ले गया था। मामले में ऑन कॉल ड्यूटी पर तैनात डॉ. सोनल अग्रवाल, एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. निधि पांडे व नर्सिंग ऑफिसर साधना वर्मा, सीमा मुजालदे को सस्पेंड कर दिया गया। एनएचएम ने 5 सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है।
डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला बोले- मरीजों और परिजनों से संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार जरूरी है। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
एनएचएम ने डॉ. बीनू कुशवाहा की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है। यह भर्ती से मौत तक के इलाज, मेडिकल प्रोटोकॉल और मरीज से व्यवहार की जांच करेगी। यह भी देखा जाएगा कि कल्पना वार्ड से बाहर आकर खुद को बचाने की गुहार क्यों लगा रही थी। कमेटी तीन दिन में रिपोर्ट देगी। पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट से साफ होगा कि मौत गंभीर बीमारी से हुई या इलाज में कोई चूक भी हुई।
परिजनों का आरोप
इलाज में लापरवाही हुई, एनेस्थीसिया ज्यादा दिया… नर्सिंग स्टाफ ने दुर्व्यवहार भी किया
परिजनों का आरोप है कि कल्पना के इलाज में लापरवाही हुई। उन्होंने एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा दिए जाने की आशंका भी जताई है। नर्सिंग स्टाफ पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। परिजनों की मांग पर कल्पना और उसके गर्भस्थ शिशु का पोस्टमॉर्टम जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की संयुक्त टीम से कराया गया है। रिपोर्ट का इंतजार है।
अस्पताल का पक्ष
भर्ती के समय गंभीर थी हालत… प्लेटलेट 30 हजार ही थे; बीपी और लिवर एंजाइम बढ़े थे
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक कल्पना को 26 अगस्त की सुबह 2:38 बजे भर्ती किया गया था। तब प्लेटलेट काउंट करीब 30 हजार प्रति माइक्रोलिटर था। ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था और लिवर एंजाइम भी बढ़े हुए थे। जांच में गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपीनिया और हेल्प सिंड्रोम पाया गया। इलाज के दौरान उसी दिन रात 11:55 बजे कल्पना व गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई।