भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की ऐसी कोई भी नियुक्ति नहीं होती है, जिसे लेकर विवाद न हो। कई बार नियुक्ति निरस्त करनी पड़ती हैं तो कुछ को समायोजित करके मामले को ठंडा करने का प्रयास किया जाता है। इससे संगठन की गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं।
आगामी कुछ माह में प्रदेश से लेकर जिला स्तर पर विभिन्न इकाइयों में नियुक्ति होनी हैं। इसमें विवाद की स्थिति न बने, इसलिए पार्टी ने तय किया है कि जिला और संभाग स्तर पर गठित समन्वय समिति से नियुक्त किए जाने वाले नाम पर मुहर लगवाई जाएगी। प्रदेश में कांग्रेस दो साल से संगठन के सशक्तीकरण की दिशा में काम कर रही है।
प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का प्रयास यही रहा कि समन्वय बनाकर आम सहमति से नियुक्ति की जाएं। जिलाध्यक्ष संगठन सृजन अभियान के माध्यम से केंद्रीय पर्यवेक्षकों की अनुशंसा पर बनाए गए। इसे लेकर कई जिलों में विवाद भी हुआ। विरोध-प्रदर्शन जिला मुख्यालय से निकलकर भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय तक पहुंचे।
संगठन फूंक-फूंककर रख रहा कदम
इससे सबक लेकर जिला कार्यकारिणी के गठन में भी जिले के सभी वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श करके नियुक्ति की गईं तो शिकवा-शिकायतें अपेक्षाकृत कम हुईं। अब चूंकि, 19 विभाग और 34 प्रकोष्ठों में राज्य से लेकर जिला स्तर तक नियुक्ति होनी हैं और अगले साल से चुनाव भी प्रारंभ हो रहे हैं, इसलिए संगठन फूंक-फूंककर कदम रख रहा है ताकि कोई विवाद न होने पाए।
ऐसे में, प्रदेश कांग्रेस ने तय किया है कि जिला स्तर पर जो भी नियुक्ति होंगी, उसके पहले समन्वय समिति से नामों पर मुहर लगवाई जाए। ये जिला और संभाग स्तर पर गठित हैं। इनमें क्षेत्र के सभी विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद, जिला और ब्लॉक पंचायत के अध्यक्ष, नगर निगम के महापौर, नगर पालिका के अध्यक्ष से लेकर वरिष्ठ नेता रहते हैं।