राजधानी भोपाल में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा दिया है। इस साल अगस्त महीने में डेंगू और चिकनगुनिया के मामलों में अचानक भारी उछाल देखने को मिला है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अगस्त की तुलना में इस साल डेंगू के मरीजों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। जलभराव के कारण मच्छरों का लार्वा तेजी से पनप रहा है, जिसने नगर निगम और स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी है।
अगस्त के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
- जिला मलेरिया कार्यालय (DMO) से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो 25 अगस्त तक शहर में डेंगू के 22 पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं, जबकि पिछले साल अगस्त की इसी अवधि में यह आंकड़ा सिर्फ 9 था। यानी डेंगू के मामले करीब 2.4 गुना बढ़ गए हैं।
- स्वास्थ्य विभाग ने इस साल टेस्टिंग में भी तेजी दिखाई है। पिछले साल अगस्त में 639 टेस्ट हुए थे, जबकि इस बार 1,400 लोगों की जांच की गई है। इसके अलावा, चिकनगुनिया के मामले भी दोगुने हो गए हैं। पिछले साल अगस्त में चिकनगुनिया के मात्र 4 केस थे, जो इस बार बढ़कर 8 हो गए हैं।
सालाना रिकॉर्ड दे रहा थोड़ी राहत
- भले ही अगस्त के महीने में मरीजों की संख्या डरा रही हो, लेकिन अगर 1 जनवरी से 25 अगस्त तक के ओवरऑल आंकड़ों को देखें, तो स्थिति नियंत्रण में नजर आती है। इस साल अब तक डेंगू के कुल 71 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पिछले साल इसी अवधि में 63 थे।
- सबसे बड़ी राहत चिकनगुनिया के ओवरऑल आंकड़ों में है; पिछले साल 25 अगस्त तक इसके 58 मरीज मिले थे, लेकिन इस साल यह संख्या घटकर मात्र 22 रह गई है। इससे साफ है कि शहर में कोई बड़ी आउटब्रेक (महामारी) नहीं है, बल्कि यह हालिया बारिश का असर है।
क्यों बढ़ रहा खतरा और क्या हैं बचाव के तरीके?
- मामले बढ़ने की सबसे बड़ी वजह भारी मानसूनी बारिश और उसके बाद खाली प्लॉट, गमलों या छतों पर भरा बारिश का साफ पानी है, जो मच्छरों की ब्रीडिंग के लिए सबसे अनुकूल होता है। इसके साथ ही, इस साल स्वास्थ्य विभाग द्वारा ज्यादा सैंपलिंग और सर्विलांस भी मामलों के बढ़ने की एक वजह है।
- क्या करें: नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल (NCVBDC) और स्थानीय डॉक्टरों ने शहरवासियों को हिदायत दी है कि घरों के आस-पास या छतों पर पानी जमा न होने दें।
क्या न करें
बुखार या शरीर टूटने जैसे लक्षण दिखने पर खुद से दवा (self-medication) बिल्कुल न लें, बल्कि तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर ब्लड टेस्ट करवाएं और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।