नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 10 सितंबर को फूड रेगुलेटर FSSAI को आदेश दिया था कि वह 10 दिनों के भीतर अपने प्रस्तावित ‘फ्रंट-ऑफ-पैक’ चेतावनी लेबल को लागू करने के बारे में जानकारी स्पष्ट करे। फूड पैकेजिंग में सुधार से जुड़ा यह लेबल पिछले एक दशक से विवादों में रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद से ही कुकीज, नूडल्स, स्नैक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और फ्रोजन फूड्स बनाने वाली कंपनियों में हड़कंप मचा है। वे इस मामले में अंतिम फैसला आने से पहले ही अपने प्रोडक्ट्स में चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम करने की जल्दी में हैं।
ईटी की एक रिपोर्ट में इंडस्ट्री के बड़े अधिकारियों के हवाले से यह दावा किया गया है। कई मल्टीनेशनल कंपनियां ग्लोबल हेडक्वार्टर द्वारा तय समय-सीमा से पहले ही नमक और चीनी कम कर रही हैं। पहली बार ऐसा हो रहा है। उन्हें डर है कि अगर FSSAI की प्रस्तावित लाल हेक्सागोनल चेतावनी अनिवार्य हो गई, तो उनकी बिक्री घट सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
पैक्ड स्नैक्स बनाने वाली एक बड़ी कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, "कोई भी अंतिम फैसले का इंतजार नहीं कर रहा है, क्योंकि यह नियम जल्द ही लागू होने वाला है। इसके अलावा, चीनी और नमक कम करने से स्वाद पर असर पड़ सकता है, इसलिए हम मौजूदा उत्पादों की रेसिपी बदलने की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं। इसमें कम से कम छह-आठ महीने लग जाते हैं।"
एफएसएसएआईने पिछले महीने प्रस्ताव दिया था कि पैकेट पर ज्यादा चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की जानकारी सामने की तरफ लाल हेक्सागोनल चेतावनी लेबल के साथ दी जानी चाहिए और इसे दो चरणों में लागू किया जाना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फूड रेगुलेटर से स्पष्टीकरण मांगा था।
क्या कर रही हैं कंपनियां?
कई बड़ी पैक्ड फूड कंपनियों के साथ मिलकर काम करने वाली डेलॉइट साउथ एशिया के पार्टनर और कंज्यूमर इंडस्ट्री लीडर आनंद रामनाथन ने कहा, "मौजूदा हालात को देखते हुए देसी-विदेशी पैक्ड फूड कंपनियां अपने सभी उत्पादों में नमक, चीनी और फैट की मात्रा कम करने की प्रक्रिया तेज कर रही हैं। हालांकि कई बड़े ब्रांड पहले से ही इस दिशा में बढ़ रहे थे, लेकिन अब वे इस कटौती की प्रक्रिया को और तेज कर रहे हैं।"