नई दिल्ली: यह कहानी है वैभव गुप्ता और अमन गुप्ता की। दोनों आईआईटी खड़गपुर से पासआउट हैं। इन्होंने एक छोटे से आइडिया को सफल बिजनेस में तब्दील कर दिया है। दोनों ने महसूस किया कि आधुनिकता के इस दौर में किचन के उपकरण और ग्रोसरी डिलीवरी का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। लेकिन, घरों में खाना बनाने वाले ‘कुक’ को ढूंढने का तरीका आज भी पुराना और असंगठित ही है। इसी आइडिया के साथ मई 2020 में ‘शेफकार्ट’ (ChefKart) की शुरुआत हुई। गुरुग्राम से शुरू हुआ यह स्टार्टअप आज ग्राहकों को उनके घर पर शेफ उपलब्ध कराने वाला सफल प्लेटफॉर्म बन चुका है। इससे वर्किंग प्रोफेशनल्स की जिंदगी आसान हुई है। साथ ही हजारों शेफ्स को भी वित्तीय सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार मिला है। आइए, यहां वैभव गुप्ता और अमन गुप्ता की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
ऐसे आया आइडिया
वैभव गुरुग्राम में अमेरिकन एक्सप्रेस में बिजनेस एनालिस्ट के तौर पर काम करते थे। तब उन्हें अपने लिए एक अच्छा शेफ ढूंढने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने देखा कि अक्सर सिक्योरिटी गार्ड या दोस्तों के रेफरेंस के भरोसे कुक ढूंढना पड़ता था। इसमें कोई ट्रांसपेरेंसी या ऑप्शन नहीं था। अपने कॉलेज के दिनों में ‘क्रीज’ नाम से ऑन-डिमांड लाउंड्री सर्विस शुरू करने का अनुभव उनके पास पहले से था। कॉर्पोरेट नौकरी की थकान और कुछ अपना शुरू करने की चाह ने उन्हें अप्रैल 2020 में अपनी नौकरी छोड़ने और अमन गुप्ता के साथ मिलकर ‘शेफकार्ट’ की नींव रखने के लिए प्रेरित किया।
ग्राहकों का जीता भरोसा
मई 2020 में कोरोना महामारी अपने चरम पर थी। तब स्टार्टअप ने गुरुग्राम में अपनी शुरुआत की। शुरुआती दौर में ग्राहकों की प्रतिक्रिया धीमी थी। लेकिन, सप्लायर (कुक/शेफ) के नजरिए से यह उनके लिए वरदान साबित हुआ। कारण था कि महामारी की वजह से नौकरियां गंवा चुके कई कुक उनके प्लेटफॉर्म से जुड़े। बिना किसी महंगे विज्ञापन के फेसबुक ग्रुप्स और पर्सनल कॉल्स के जरिए उन्होंने ग्राहकों का भरोसा जीता। कड़े हाइजीन स्टैंडर्ड और वेरीफाइड प्रोफेशनल्स की वजह से सितंबर 2020 तक प्लेटफॉर्म की डिमांड तेजी से बढ़ने लगी। आज यह एक जाना-माना ब्रांड बन चुका है।
ब्रांड बना रोजगार का जरिया
स्टार्टअप ने सिर्फ ग्राहकों की समस्या का समाधान नहीं किया। इसके बजाय शेफ्स की जिंदगी में भी बड़ा बदलाव लाया। पारंपरिक रूप से कुक को सिक्योरिटी गार्डों को कमीशन देना पड़ता था। सारा लेन-देन नकद में होता था। इससे उन्हें बैंक लोन या फाइनेंशियल सिक्योरिटी नहीं मिलती थी। ब्रांड ने यह सुनिश्चित किया कि हर शेफ का बैंक खाता हो। उन्हें ऐप पर डेली पेमेंट आए। लगभग 2 लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर मिले। रेटिंग बेस्ड इंसेंटिव्स मिलें। सिंगल मदर जैसी कई महिलाओं ने इस प्लेटफॉर्म के जरिए जुड़कर हर महीने 40,000 रुपये तक की कमाई की है। यह इस सफर को और भी सार्थक बनाता है।
अब करोड़ों की कमाई
आज ब्रांड गुरुग्राम में मजबूत पकड़ के साथ हर महीने करीब 1 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमा रहा है। यह सालाना 12 से 13 करोड़ रुपये के करीब है। जोमैटो के सह-संस्थापक दीपिंदर गोयल जैसे दिग्गज भी इस स्टार्टअप में निवेशक के रूप में जुड़े हैं। प्लेटफॉर्म अब गुरुग्राम से आगे बढ़कर दिल्ली और बेंगलुरु जैसे नए बाजारों में अपने क्लस्टर बढ़ाने की योजना में है। शेफ बुकिंग के अलावा, कंपनी का टारगेट मील प्लानिंग और ग्रोसरी शॉपिंग जैसी सेवाओं को जोड़कर एक संपूर्ण कुकिंग एक्सपीरियंस देना है।