मध्य प्रदेश क्राइम फाइल के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 5-6 मई 2023 की रात चित्रकूट के मंदाकिनी घाट पर एक युवक और युवती के साथ पांच नकाबपोश युवकों ने मारपीट की। दोनों को धमकाकर नावों में बैठाया। युवक को एक नाव में अलग कर दिया जबकि युवती को दूसरी नाव से घाट से करीब आधा किलोमीटर दूर ले गए। सुनसान जगह पर युवती के साथ गैंगरेप किया।
करीब एक घंटे बाद दोनों को घाट के पास छोड़कर आरोपी नाव से फरार हो गए। वारदात के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के दो जवानों ने दोनों को देखा और रात में ही चित्रकूट थाने पहुंचाया। अगले दिन पुलिस ने पांच अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की।
अब आगे की कहानी पढ़िए…
जांच के शुरुआती दौर में ही पुलिस के सामने दो सवाल खड़े थे- नकाबपोश आरोपी कौन थे और आधी रात को सुनसान घाट पर उनके साथ मौजूद यह युवती आखिर चित्रकूट आई कहां से थी?
यहीं से केस ने नया मोड़ लिया। पीड़िता अपनी उम्र और पहचान को लेकर कुछ छिपा रही थी। वह अपनी उम्र 18 साल से ज्यादा बता रही थी। युवती की कुछ बातों ने जांच अधिकारियों को उलझा दिया था। वह चित्रकूट क्यों आई थी? रात में घाट पर क्यों गई? उसके साथ मौजूद युवक मनोज कौन था?
हैदराबाद से चित्रकूट आई थी युवती
पीड़िता ने बताया कि वह अपनी मां के साथ हैदराबाद में रहती थी। बांदा का रहने वाला मनोज भी हैदराबाद में काम करता था। वहीं उसकी मां और मनोज की जान-पहचान हुई थी। इसके बाद युवती की भी मनोज से दोस्ती हो गई और दोनों फोन पर बातचीत करने लगे।
4 मई को युवती अपनी मां के साथ चित्रकूट के लिए निकली थी। चित्रकूट में उसका मामा का गांव भी है। रास्ते में उसने मनोज को फोन कर बताया कि वे चित्रकूट आ रहे हैं। मनोज ने कहा कि वह उसका इलाज भी करा देगा।
नदी के घाट पर ही बनाए शारीरिक संबंध
5 मई को मां-बेटी चित्रकूट पहुंचीं। कामतानाथ के दर्शन किए और परिक्रमा के बाद वापस लौटीं। मंदिर के नीचे उन्हें मनोज मिल गया।युवती की मां ने मनोज से कहा कि उसकी बेटी के पेट में अक्सर दर्द रहता है, इसलिए उसका इलाज करा दे। इसके बाद वह अपनी बेटी को मनोज के पास छोड़कर भाई के घर चली गई।
इसके बाद दोनों चित्रकूट में घूमे और खाना खाया। रात में दोनों ने होटल में कमरा लेने की कोशिश की, लेकिन आधार कार्ड नहीं होने के कारण कमरा नहीं मिला। वे घूमते हुए राघव घाट पहुंच गए। घाट पर एक बड़े गुंबद के पास कपड़े बदलने के लिए कमरा बना था। दोनों वहीं रुक गए।
अचानक पहुंचे चार-पांच युवक, जबरदस्ती नाव में बैठाया
पीड़िता के मुताबिक, इसी दौरान चार-पांच युवक वहां पहुंच गए। उन्होंने दोनों को संबंध बनाते देख लिया। इसके बाद उनके साथ मारपीट की और दोनों को अपने कब्जे में ले लिया।
आरोपियों ने मनोज को एक नाव में अलग बैठा दिया और लड़की को दूसरी नाव से घाट से दूर ले गए। इसके बाद उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। युवती को धमकाया कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसे जान से मार देंगे।
एक-दूसरे के नाम लेने की वजह से पकड़ में आए
युवती ने पुलिस को बताया कि वारदात के दौरान आरोपी आपस में एक-दूसरे का नाम ले रहे थे। इनमें गोलू और विनोद शामिल थे। पुलिस के सामने अब पहली बार संदिग्धों की पहचान की दिशा में ठोस सुराग था।
जांच आगे बढ़ी और पुलिस ने चार-पांच संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया। इनमें से तीन युवकों की पहचान युवती ने कर दी।
सबसे बड़ा ट्विस्ट, पीड़िता की उम्र 18 साल नहीं थी
जांच के दौरान पुलिस को पीड़िता की उम्र पर संदेह हुआ। मामला अदालत पहुंचा तो उम्र का सवाल बेहद अहम हो गया। वजह थी पॉक्सो एक्ट। पीड़िता ने अदालत में अपनी उम्र 18 साल बताई। उसकी मां के अलग-अलग बयानों में भी उम्र को लेकर एकरूपता नहीं थी।
पुलिस ने इसके बाद उम्र की पुष्टि के लिए दस्तावेज जुटाए। जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल की मार्कशीट और जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले गांव के सरपंच के बयान की जांच की गई। दस्तावेजों की जांच के बाद तस्वीर साफ हुई। लड़की की उम्र 18 साल से ज्यादा नहीं, बल्कि 16 साल से भी कम थी। यानी वह कानून की नजर में नाबालिग थी। यहीं से केस में एक और बड़ा मोड़ आया।
बॉयफ्रेंड भी आरोपी बना, दुष्कर्म का केस चला
जांच में सामने आया कि मनोज ने भी नाबालिग लड़की के साथ संबंध बनाए थे। उस पर भी नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। मेडिकल जांच में भी इसकी पुष्टि हुई। पुलिस ने घटना से जुड़े कपड़े, मेडिकल सैंपल और नावों को जांच के लिए सुरक्षित किया था। नावों से मिले साक्ष्यों की भी फोरेंसिक जांच कराई गई।
दो आरोपियों को बरी कर दिया गया
पीड़िता ने अदालत में मोहित, विनोद और पंकज की पहचान की। रामगोपाल और संतोष को उसने पहचानने से इनकार कर दिया। इन दोनों के खिलाफ अदालत में ऐसा पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला, जिससे अपराध में उनकी भागीदारी साबित हो सके। डीएनए जांच में भी उनके प्रोफाइल नहीं मिले।
इस आधार पर अदालत ने रामगोपाल और संतोष को दोषमुक्त कर दिया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने डीएनए सैंपल की जांच में हुई देरी और सैंपल की कस्टडी पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने सैंपल से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई। अदालत ने इन दलीलों पर विचार किया, लेकिन इन्हें स्वीकार नहीं किया।
गैंगरेप के दोषियों को 20 साल कारावास
29 दिसंबर 2025 को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने गोलू निषाद, विनोद निषाद और पंकज जोशी को अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट से जुड़ी धाराओं में दोषी ठहराया। तीनों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही 20-20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
वहीं, लड़की के साथ संबंध बनाने वाले मनोज को नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में दोषी ठहराया गया। उसे भी 20 साल के कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।