जिम में वर्कआउट करने के दौरान कपड़े पसीने से पूरी तरह भीग जाएं और वजन मशीन पर पहले से कम दिखाई दे, तो कई लोगों को लगता है कि उन्होंने ज्यादा फैट बर्न कर लिया है। इसी वजह से कुछ लोग मानते हैं कि जितना ज्यादा पसीना आएगा, उतनी तेजी से शरीर का मोटापा कम होगा। लेकिन क्या सच में पसीने से फैट बर्निंग का सीधा कनेक्शन है? वास्तव में पसीना शरीर की गर्मी नियंत्रित करने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। व्यायाम या एक्सरसाइज के दौरान मसल्स ज्यादा सक्रिय होती हैं और शरीर में गर्मी बढ़ती है। शरीर में अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालने के लिए पसीना आता है। इसलिए पसीने की मात्रा को अकेले फैट लॉस का पैमाना मानना सही नहीं है।
ज्यादा पसीना आने का मतलब ज्यादा फैट बर्न होना है?
ज्यादा पसीना आना जरूरी नहीं कि ज्यादा फैट बर्न होने का संकेत हो। किसी व्यक्ति को हल्की एक्सरसाइज में भी बहुत पसीना आ सकता है, जबकि दूसरा व्यक्ति ज्यादा इंटेस वर्कआउट करने के बावजूद अपेक्षाकृत कम पसीना बहा सकता है।
एक्सरसाइज के दौरान शरीर पसीना क्यों निकालता है?
एनसीबीआई के अनुसार पसीने को एक्सरसाइज और गर्म वातावरण में शरीर का थर्मल बैलेंस बनाए रखने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया गया है। पसीने के वाष्प के दौरान गर्मी से बाहर जाती है। इससे शरीर के सामान्य तापमान को बनाए रखने में मदद मिलती है।
पसीना निकलने और कैलोरी बर्न के बीच क्या संबंध है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। एक्सरसाइज के दौरान कैलोरिज बर्न होती हैं क्योंकि शरीर फिजिकल एक्टिविटी करने के लिए एनर्जी खर्च करता है। लेकिन कैलोरी बर्न होने का कारण पसीना नहीं है। उदाहरण के लिए, तेजी से चलना, साइकिलिंग, रनिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के दौरान मसल्स एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं। इससे एनर्जी का कुल खर्च बढ़ता है। केवल पसीने की मात्रा को देखकर यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि कितनी कैलोरिज या कितना फैट बर्न हुआ है।
एनसीबीआई के अनुसार एक बड़े रिव्यू में करीब 6,880 प्रतिभागियों के डाटा का विश्लेषण किया गया। इसमें एरोबिक एक्सरसाइज की मात्रा बढ़ने के साथ बॉडी वेट, कमर का आकार और बॉडी फैट प्रतिशत में कमी देखी गई। यह सबूत एक्सरसाइज और बॉडी फैट में कमी के बीच संबंध को सपोर्ट करता है, लेकिन इसे पसीने की मात्रा से जोड़ना सही नहीं होगा।
वर्कआउट के बाद वजन अचानक कम क्यों दिखाई देता है?
एनसीबीआई के अनुसार एक्सरसाइज के दौरान पसीने के रूप में शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर (इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी) निकलते हैं। अगर वर्कआउट काफी इंटेंश हो या गर्म और ह्यूमिड वातावरण में किया गया हो, तो फ्लूइड लॉस ज्यादा हो सकता है। इससे वर्कआउट खत्म होने के तुरंत बाद वेट स्केल पर बॉडी वेट कम दिखाई दे सकता है।
जिम में ज्यादा पसीना आना यह बताता है कि शरीर गर्मी को एडजस्ट करने के लिए पसीना आ रहा है, लेकिन यह अपने आप में ज्यादा फैट बर्निंग का प्रमाण नहीं है। वर्कआउट के तुरंत बाद वजन कम दिखना भी अक्सर वेट लॉस से जुड़ा हो सकता है। वास्तविक मोटापा कम करने की एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी, एनर्जी बैलेंस और डाइट और लाइफस्टाइल कई स्तरों पर भूमिका निभाते हैं। इसलिए “जितना ज्यादा पसीना, उतना ज्यादा फैट बर्न वाली सोच पर निर्भर रहने के बजाय वर्कआउट की क्वालिटी और निरंतरता पर ध्यान देना बेहतर है।