रियाद: इस साल अगस्त में बने सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान के सैन्य गठबंधन की आज, सोमवार को रियाद में बैठक हो रही है। पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की की स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमेटी रियाद में मक्का समझौते के भविष्य पर चर्चा करेगी। इसे बैठक को मक्का डिफेंस एग्रीमेंट की परीक्षा की तरह देखा जा रहा है क्यों यह मीटिंग ऐसे वक्त हो रही है, जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोही आमने-सामने हैं। ऐसे में इस पर नजर लगी हुई है कि क्या रियाद की बैठक से मक्का पैक्ट एक्टिवेट होगा और तीनों देश मिलकर हूतियों के खिलाफ लड़ाई शुरू करेंगे।
रियाद की इस बैठक में तुर्की, पाक, सऊदी के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में खासतौर से सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों से निपटने को लेकर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा इस सैन्य समझौते के काम करने के तरीके और भविष्य गठबंधन को संस्थागत रूप देने के अगले कदमों पर भी बात होनी है।
मक्का समझौते के केंद्र में हूती
मक्का समझौते पर 7 अगस्त को तीनों देशों के नेताओं ने दस्तखत किए हैं। इस समझौते का एक प्रावधान नाटो की तरह से सामूहिक रक्षा की व्यवस्था करता है, जिसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा। ये समझौता हालिया दिनों में इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि हूतियों ने ड्रोन और मिसाइल से सऊदी को निशाना बनाया है।
अगस्त में समझौते के बाद से तीनों देश गठबंधन के संस्थागत और सैन्य ढांचे पर काम कर रहे हैं लेकिन हूतियों के मुद्दे ने हालिया हफ्तों में चिंता को बढ़ा दिया है। सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहा है, जबकि ईरान समर्थित हूती विद्रोही राजधानी सना समेत उत्तरी यमन के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण रखते हैं।
पाकिस्तान, तुर्की पर सवाल
पाकिस्तान ने हूतियों के सऊदी अरब पर हमले की निंदा की है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ कह चुके हैं कि इस्लामाबाद समझौते के तहत सऊदी अरब की रक्षा के लिए हर संभव कोशिश करेगा। तुर्की के नेताओं ने भी सऊदी अरब पर हूतियों के हमले की कई मंचों से आलोचना की है।
तुर्की और पाकिस्तान ने हूतियों की आलोचना की है लेकिन उनके खिलाफ सऊदी के सैन्य अभियानों में सीधी भागीदारी की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में इस पर लगातार सवाल पूछे जा रहे हैं कि आखिर मक्का समझौते के तहत किए वादे को पूरा करते हुए दोनों देश कब सऊदी के लिए लड़ाई में उतरेंगे।