भोपाल, अगर एयरलाइन बिना पर्याप्त सूचना के आखिरी समय में फ्लाइट का समय बदल देती है, जरूरी सहायता नहीं देती या फिजूल की देरी से परेशानी होती है, तो आप मुआवजे के हकदार हो सकते हैं।
भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने ऐसे मामले में एयर इंडिया को छह वरिष्ठ नागरिक यात्रियों को 96 हजार रुपए (क्षतिपूर्ति व वाद व्यय) देने का आदेश दिया है। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए एयरलाइन को जिम्मेदार ठहराया।
भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एयर इंडिया को छह वरिष्ठ नागरिक यात्रियों को 90 हजार रुपए क्षतिपूर्ति और 6 हजार रुपए वाद व्यय, कुल 96 हजार रुपए देने का आदेश दिया है। बेंच-2 के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्य अंजुम फिरोज और प्रीति मुद्गल ने यह फैसला सुनाया।
आयोग ने माना कि एयरलाइन ने यात्रा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले फ्लाइट का कार्यक्रम बदल दिया। यात्रियों को समय पर पर्याप्त सूचना और वैकल्पिक सहायता नहीं दी गई।
साथ ही, उड़ान में देरी के कारणों का एयरलाइन कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सकी। इसे उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना गया।
आयोग ने एयर इंडिया को आदेश की तिथि से दो माह के भीतर यह राशि 8 दिसंबर 2024 (परिवाद दायर होने की तारीख) से 7 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज सहित संबंधित यात्रियों को अदा करने का निर्देश दिया है।
एक महीने पहले की थी पूरी ट्रिप की प्लानिंग
मामले के अनुसार भोपाल निवासी डॉ. शैलेन्द्र निगम, डॉ. सुषमा निगम, सुदेश सक्सेना, शालिनी सक्सेना, डॉ. एम.एल. बंजारे और बुशन बंजारे ने 13 अप्रैल 2024 को 11 मई 2024 की भोपाल-दिल्ली-श्रीनगर और 17 मई 2024 की वापसी यात्रा के लिए एयर इंडिया के टिकट बुक कराए थे। टिकटों पर करीब 1.18 लाख रुपए खर्च किए गए थे।
टिकट कन्फर्म होने के बाद यात्रियों ने श्रीनगर, पहलगाम और गुलमर्ग में होटल, हाउसबोट, स्थानीय पर्यटन, टैक्सी, भोजन और अन्य पर्यटन सेवाओं की अग्रिम बुकिंग कर ली थी।
वापसी में दिल्ली से रानी कमलापति स्टेशन तक वंदे भारत एक्सप्रेस के एसी-1 और एसी-2 के पहले से आरक्षित टिकट भी आगे बढ़ाने पड़े। इससे यात्रियों को मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
दो घंटे पहले बताया- आज यात्रा नहीं होगी
परिवाद में कहा गया कि यात्रा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले एयर इंडिया ने सूचना दी कि उनकी निर्धारित यात्रा नहीं हो सकेगी और उन्हें अगले दिन भेजा जाएगा। इससे पहले से तय पूरा कार्यक्रम बिगड़ गया।
यात्रियों का कहना था कि उन्होंने एयरलाइन अधिकारियों से कारण पूछा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बाद में बाहरी स्रोतों से जानकारी मिली कि संबंधित पायलट के अवकाश पर होने के कारण कुछ यात्रियों की बुकिंग निरस्त की गई थी।
इसी आधार पर उन्होंने एयरलाइन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कहा कि यदि समय रहते सूचना मिलती तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ता।
होटल, ट्रैवल और रेलवे बुकिंग दोबारा करनी पड़ी
फ्लाइट एक दिन आगे बढ़ने से यात्रियों को श्रीनगर, पहलगाम और गुलमर्ग के होटल दोबारा बुक कराने पड़े। स्थानीय टैक्सी और पर्यटन पैकेज भी बदलने पड़े। श्रीनगर से जम्मूतवी की बुकिंग रद्द करनी पड़ी और वापसी की रेलवे यात्रा प्रभावित हुई।
परिवादियों का दावा था कि इन सबके कारण प्रत्येक व्यक्ति को लगभग 40 हजार रुपए का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ा। एयर इंडिया से बार-बार मुआवजे की मांग के बावजूद राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।
एयर इंडिया ने आयोग में दिया ‘बर्ड स्ट्राइक’ का तर्क
एयर इंडिया ने अपने जवाब में कहा कि फ्लाइट रद्द नहीं हुई थी। दिल्ली में बर्ड स्ट्राइक की अप्रत्याशित घटना से विमान के परिचालन में देरी हुई थी। इसी वजह से भोपाल से दिल्ली की उड़ान प्रभावित हुई और यात्रियों की दिल्ली-श्रीनगर कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने की संभावना थी।
इसलिए यात्रियों को अगले दिन की फ्लाइट में समायोजित किया गया। एयरलाइन ने इसे नियंत्रण से बाहर की परिस्थिति बताते हुए सेवा में कमी से इनकार किया।
आयोग बोला- दावा किया, लेकिन सबूत नहीं दिया
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि एयर इंडिया ने बर्ड स्ट्राइक का दावा किया, लेकिन समर्थन में डीजीसीए की जांच रिपोर्ट, तकनीकी रिपोर्ट या कोई स्वतंत्र दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया। केवल लिखित दावा पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि कोई एयरलाइन फोर्स मेज्योर का दावा करती है तो उसका प्रमाण देना भी उसकी जिम्मेदारी है।
आयोग ने माना कि यात्रियों को यात्रा से केवल दो घंटे पहले सूचना देना और पहले से हुई बुकिंग के नुकसान की भरपाई के लिए उचित सहायता नहीं देना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
आयोग में पहली बार एयरलाइन ने ‘बर्ड स्ट्राइक’ की बात कही
परिवादियों की ओर से पैरवी करने वाली अधिवक्ता कल्पना वर्मा ने बताया कि छहों यात्री वरिष्ठ नागरिक थे। उन्होंने पूरी यात्रा की अग्रिम योजना बनाकर होटल, स्थानीय परिवहन, हाउसबोट, रेलवे टिकट और अन्य बुकिंग का भुगतान पहले ही कर दिया था।
फ्लाइट का कार्यक्रम अचानक बदलने से उन्हें सभी व्यवस्थाएं रद्द कर दोबारा करनी पड़ीं। इससे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक प्रताड़ना भी हुई। उन्होंने कहा कि जब यात्रियों ने एयरलाइन से कारण पूछा तो उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
बाद में अलर-अलग सोर्सेस से पता चला कि संबंधित पायलट के अवकाश पर होने के कारण कुछ यात्रियों की बुकिंग निरस्त की गई थी। वहीं, एयर इंडिया ने उपभोक्ता आयोग में लिखित जवाब दाखिल करते समय पहली बार ‘बर्ड स्ट्राइक’ को कारण बताया।