नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस और उसके सबसे बड़े स्टेकहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। टाटा संस को लिस्टिंग से बचाने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने एक रीस्ट्रक्चरिंग प्रपोजल भेजा था। अब टाटा संस बोर्ड ने इसकी वैलिडिटी पर कानूनी राय मांगी है। माना जा रहा है कि इस पर विचार करने के लिए आधिकारिक तौर पर कोई मीटिंग होने की संभावना नहीं है।
ईटी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि प्रपोजल को फॉर्मल शेयरहोल्डर मैंडेट नहीं माना जा सकता क्योंकि इसे सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने आधिकारिक रूप से मंजूरी नहीं दी है और इसे साइन किए गए वैलिड रेजोल्यूशन के तौर पर पेश नहीं किया गया था। टाटा संस ने कोई कमेंट नहीं किया।
क्या है मामला?
आरबीआई ने टाटा संस को अपर लेयर NBFC पर लागू नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही टाटा संस ने RBI के लिस्टिंग डायरेक्टिव का पालन करने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों ने कहा कि टाटा संस के रेगुलेटरी स्टेटस पर RBI के फैसले को शेयरहोल्डर्स के किसी दूसरे प्रपोजल से हटाया नहीं जा सकता और रेगुलेटर को खुद से सोचना होगा कि प्रस्तिवात रीस्ट्रक्चरिंग उसकी जरूरतों को पूरा करती है या नहीं।
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस बोर्ड को दो ऑपरेटिंग कंपनियों टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को होल्डिंग कंपनी में मर्ज करने का प्रस्ताव दिया था। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में 66% हिस्सेदारी है। उसका कहना है कि रीस्ट्रक्चरिंग से कंपनी को इतनी ऑपरेटिंग इनकम मिलेगी कि वह NBFC के लिए प्रिंसिपल-बिजनेस क्राइटेरिया से बाहर हो जाएगी।
84 कैविएट फाइल
इस बीच सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) को छोड़कर सात टाटा ट्रस्ट्स ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष 84 कैविएट फाइल किए हैं। सूत्रों का कहना है कि इसका मकसद यह पक्का करना है कि ट्रस्ट्स के बारे में कोई भी ऑर्डर देने से उनका पक्ष सुना जाए। लोगों ने बताया कि फाइलिंग में नोएल और नेविल टाटा का नाम कैविएटर के तौर पर लिया गया है। टाटा ट्रस्ट्स ने इस पर कोई कमेंट नहीं किया।