भोपाल। भोपाल शहर के बीच 200 से अधिक राष्ट्रीय पक्षी मोरों के प्राकृतिक बसेरे को मोरों पर केंद्रित देश के सबसे बड़े एकीकृत बायोडायवर्सिटी पार्क की योजना तैयार की गई है। यह बायोडायवर्सिटी पार्क शाहपुरा पहाड़ी पर स्थित मोर वन में 60 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। परियोजना को मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड और वन विभाग की निगरानी में पीपीपी मोड पर विकसित करने की योजना है। इस तरह राजधानी के बीचों-बीच मौजूद मोरों का यह प्राकृतिक बसेरा आने वाले समय में संरक्षण, शिक्षा और ईको-टूरिज्म के राष्ट्रीय स्तर के मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
इसलिए पार्क की पूरी अवधारणा इस प्राकृतिक आवास को संरक्षित रखते हुए तैयार की गई है। इसके लिए मप्र राज्य बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने सर्वे करा लिया है और अब डीपीआर तैयार की जा रही है। सर्वे के दौरान मोरवन में 301 पेड़, 178 हर्ब, 22 झाड़ी, 21 क्लाइंबर और 21 घास प्रजातियां मिलीं हैं। साथ ही फौना सर्वे में 34 आर्थ्रोपोड, 25 पक्षी भी सर्वे में दर्ज की गईं। प्रस्तावित पार्क में करीब 78 प्रतिशत क्षेत्र प्राकृतिक वाइल्डरनेस और हैबिटेट के रूप में संरक्षित रहेगा। शेष करीब 22 प्रतिशत यानी 13.72 हेक्टेयर क्षेत्र में लोगों के लिए सुविधाएं और गतिविधियां विकसित की जाएंगी।
योजना में तितली संरक्षण, पवित्र उपवन, लोकवानस्पतिक उद्यान समेत करीब 20 थीमैटिक जोन प्रस्तावित हैं। इससे मोरवन सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि जैव विविधता को करीब से समझने का केंद्र भी बनेगा।कैंपिंग साइट कर सकेंगे, मिनी ट्रेन की सुविधाएं भी मिलेगीपार्क में बर्ड एवियरी, कैंपिंग साइट और मिनी ट्रेन जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। बच्चों और विद्यार्थियों को प्रकृति और जैव विविधता की जानकारी देने के लिए वीआर, एआर और एक्सआर आधारित डिजिटल-इमर्सिव अनुभव विकसित किए जाएंगे। यानी जटिल पारिस्थितिकी तंत्र को तकनीक के माध्यम से आसान और रोचक तरीके से समझाया जाएगा।
पानी और ऊर्जा के इस्तेमाल का भी अलग मॉडल
मोरवन को पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ माडल के तौर पर विकसित करने की योजना है। पार्क की सिंचाई में 100 प्रतिशत ट्रीटेड वाटर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। इसके लिए करीब एक एमएलडी क्षमता की ट्रीटेड वाटर सप्लाई का प्रावधान रखा गया है। वहीं, लंबे समय की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक मेगावाट का सोलर पावर प्लांट प्रस्तावित है।
शाहपुरा पहाड़ी पर 60 हेक्टेयर क्षेत्र में से 13.72 हेक्टेयर जगह पर बायोडायवर्सिटी पार्क बनाया जाएगा। इसके लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। इस परियोजना पर करीब 184 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है।- सुदीप सिंह, मेंबर सेक्रेटरी, मप्र स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड।