बर्लिन: जनवरी 2007 में जर्मनी में नौ साल के फेलिक्स फिंकबाइनर चौथी कक्षा में थे तो उन्हें क्लाइमेट चेंज ( जलवायु परिवर्तन ) पर प्रेजेंटेशन देना था। इसी पर पढ़ते हुए उनको वंगारी मथाई की कहानी के बारे में पता चला, जिनके ग्रीन बेल्ट मूवमेंट ने केन्या में महिलाओं को 3 करोड़ पेड़ लगाने में मदद की थी। फेलिक्स ने अपने प्रेजेंटेशन को इस सुझाव के साथ खत्म किया कि हर देश के बच्चों को दस लाख पेड़ लगाने चाहिए। इसके बाद ये ऐसा आंदोलन बना, जिसके चलते एक ट्रिलियन पेड़ लगाने का शानदार काम किया जा रहा है।
फेलिक्स ने अपने प्रेजेंटेशन के बाद 28 मार्च 2007 को अपने क्लासमेट्स के साथ स्कूल के बाहर पहला पेड़ लगाया, जिससे ‘प्लांट-फॉर-द-प्लैनेट’ की शुरुआत हुई। यूनाइटेड नेशंस एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP) के अनुसार, जो चीज एक स्कूल प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुई थी, वह सिर्फ तीन साल बाद एक बहुत बड़ी उपलब्धि तक पहुँच गई, जब इस पहल के तहत जर्मनी में दस लाखवां पेड़ लगाया गया।
पेड़ लगाने का मकसद क्या है?
फेलिक्स के पहला पेड़ लगाने के बाद 20 साल बाद ‘प्लांट-फॉर-द-प्लैनेट’ नाम से शुरू हुई इस पहल का मकसद बहुत बड़ा हो गया है। इस पहल का मकसद दुनिया को एक ट्रिलियन (10 खरब) पेड़ फिर से उगाने में मदद करना है। यह एक ग्लोबल लक्ष्य है, ना कि कोई ऐसा वादा कि एक ही संस्था खुद सारे पौधे लगाएगी।
स्कूल में पढ़ने वाले इस लड़के ने 13 साल की उम्र में अपना संदेश यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली तक पहुंचाया। आज, फिंकबाइनर संस्था की पॉलिसी टीम के साथ मिलकर पेड़ लगाने और संरक्षण का काम आगे बढ़ा रहे हैं। प्लांट-फॉर-द-प्लैनेट ने प्रोजेक्ट में 3.6 करोड़ से पेड़ लगाए हैं, जबकि इसके प्लेटफॉर्म के जरिए 110 मिलियन (11 करोड़) पेड़ों के लिए फंडिंग की गई है। इसके पेड़ लगाने और संरक्षण के कामों में मेक्सिको, घाना और स्पेन के प्रोजेक्ट शामिल हैं।
चॉकलेट से भी कनेक्शन
2012 में लॉन्च हुई द चेंज चॉकलेट ने 10 मिलियन (1 करोड़) से ज्यादा पेड़ लगाने के लिए फंड जुटाने में मदद की है। चॉकलेट बार खरीदना निश्चित रूप से इसमें शामिल होने का एक आसान तरीका है। इस प्रोजेक्ट के तहत मिट्टी में बीज मौजूद हों और आसपास स्वस्थ जंगल हों, वहां रिकवरी में रुकावट डालने वाली वजहों को हटाने के बाद पेड़ कभी-कभी अपने आप वापस उग सकते हैं। ज्यादा खराब हो चुकी जगहों पर पेड़ लगाने की जरूरत पड़ सकती है।