कवर्धा। धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक आस्था की नगरी कवर्धा के सौंदर्यीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक विजय शर्मा की मंशानुरूप भव्य हनुमंत वाटिका के बाद अब जिला अस्पताल के सामने रिक्त शासकीय भूमि में 2 करोड़ 50 लाख की लागत से भव्य एवं दिव्य ‘‘शिव वाटिका’‘ का निर्माण किया जाएगा। शिव वाटिका निर्माण किये जाने हेतु राशि मांग हेतु प्रस्ताव भी शासन को प्रेषित किया जा चुका है भगवान भोलेनाथ की आस्था को केंद्र में रखकर विकसित की जाने वाली यह वाटिका शहरवासियों के लिए आकर्षण, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनेगी। नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी के नेतृत्व में नगर पालिका परिषद द्वारा शहर के प्रमुख स्थानों के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में हनुमंत वाटिका के साथ-साथ अब जिला अस्पताल के सामने बनने वाली शिव वाटिका कवर्धा शहर को एक नई और आकर्षक पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
सुबह-शाम स्वास्थ्य और सुकून का केंद्र बनेगी वाटिका
शिव वाटिका को केवल धार्मिक एवं सौंदर्यीकरण के उद्देश्य तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे नागरिकों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। सुबह और शाम शहरवासी यहां टहलने, बैठने और प्रकृति के बीच समय बिताने का आनंद ले सकेंगे। हरियाली से भरपूर वातावरण लोगों को स्वस्थ एवं सकारात्मक माहौल प्रदान करेगा। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों के लिए भी यह स्थान उपयोगी साबित होगा। यहां विकसित किए जाने वाले पाथवे और अन्य सुविधाएं नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराने में सहायक होंगी।
कवर्धा की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई मजबूती
कवर्धा की पहचान धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में प्रदेशभर में है। भोरमदेव मंदिर, बूढ़ामहादेव सहित अनेक धार्मिक स्थलों से जुड़ी आस्था को देखते हुए शहर में भगवान शिव के नाम पर बनने वाली यह वाटिका धार्मिक पर्यटन और शहर के सौंदर्यीकरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी। नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी ने कहा कि “कवर्धा की पहचान केवल एक सुंदर शहर के रूप में नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और संस्कारों से जुड़े शहर के रूप में भी होनी चाहिए। शिव वाटिका इसी सोच का हिस्सा है। हमारा प्रयास है कि शहरवासियों को ऐसे सुंदर और व्यवस्थित स्थान मिलें, जहां वे परिवार के साथ कुछ समय सुकून से बिता सकें और भगवान शिव की भक्ति से जुड़ सकें।”