ऑपरेशन सिंदूर के बाद 6 प्रोजेक्ट्स का काम धीमा पड़ा:पाकिस्तान का पानी पूरी तरह रोकने में लगेगा और समय; भारत ने सिंधु जल संधि रोकी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान जाने वाली नदियों का पानी रोकने के लिए जिन प्रोजेक्ट्स में तेजी लाई गई थी, उनका काम अब धीमा पड़ गया है। सरकार के दबाव और तेजी से काम पूरा करने के निर्देशों के बावजूद 6 प्रोजेक्ट प्रशासनिक अड़चनों, पर्यावरण मंजूरी, मजदूरों के विवाद और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अटके हुए हैं।

करीब 4,963 मेगावॉट क्षमता वाले इन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स का मकसद पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोककर स्टोर करना और उससे बिजली बनाना है। नेशनल हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, दो प्रोजेक्ट लगभग पूरे होने वाले थे, लेकिन आखिरी समय में अटक गए। अब नई मंजूरियां मिलने के बाद इन्हें पूरा होने में 2-3 साल और लग सकते हैं।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था। इसके बाद चिनाब और झेलम नदियों के पानी को रोककर इस्तेमाल करने के लिए ये प्रोजेक्ट शुरू किए गए। इनमें सबसे अहम सावलकोट प्रोजेक्ट है। 1,856 मेगावॉट क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट का ग्लोबल कंसल्टेंसी टेंडर अचानक रद्द कर दिया गया। इसकी फाइल अब PIB और CCEA की मंजूरी के इंतजार में है।

रावी और चिनाब के पानी पर हमारा पूरा कंट्रोल

भारत ने सिंधु जल समझौता स्थगित होने के बाद रावी नदी का पानी पाकिस्तान के बजाय दूसरे राज्यों में भेजना शुरू किया। इसके लिए पंजाब में शाहपुर कंडी बैराज और रणजीत सागर डैम का इस्तेमाल किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बने बगलिहार और सलाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के जरिए भी पानी के बहाव को नियंत्रित किया गया है।

वजह- 6 प्रोजेक्ट का काम कई वजहों से धीमा पड़ा

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार और ऊर्जा मंत्रालय इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए विशेष टास्क फोर्स या उच्चस्तरीय निगरानी समिति बना रहे हैं। एनएचपीसी और अन्य संबंधित एजेंसियां मंजूरी की प्रक्रिया तेज करने के उपाय भी कर रही हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को एक बार फिर धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। 

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