इस्लामाबाद: पाकिस्तान में प्रांतों को बांटने के मुद्दे पर कई राजनीतिक दलों की ओर से तीखा विरोध देखने को मिल रहा है। इसकी शुरुआत 30 जुलाई को हुई, जब गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान में शासन व्यवस्था चरमरा गई है और इसका समाधान नए प्रांत बनाना (12 से 15) या सत्ता को 160 प्रशासनिक इकाइयों में बांटना है। सेना के करीबी नकवी के इस बयान ने पाकिस्तान में सियासी हलचल मचा दी। एक्सपर्ट का मानना है कि यह सेना की पकड़ को देश पर कहीं ज्यादा मजबूत कर देगा।
स्टेट न्यूज ग्लोबल के मुताबिक, असीम मुनीर प्रांतों को अलग-अलग करना चाहते हैं। इसके पीछे की सोच विश्लेषकों को जानी-पहचानी लगती है। मुनीर 18वें संवैधानिक संशोधन को पलटना चाहेंगे, जिसने नेशनल फाइनेंस कमीशन फंड के तहत बंटने योग्य टैक्स पूल का 57.5% हिस्सा देकर प्रांतों को वित्तीय स्वायत्तता दी थी। इससे संघीय सरकार और नतीजतन सेना के अपने बजट के लिए काम करने के वास्ते कम पैसा बचा था।
संवैधानिक और राजनीतिक रुकावटें
मुनीर की महत्वाकांक्षा यानी प्रांतों का बंटवारा आसान नहीं है। किसी भी संशोधन के लिए सीनेट और नेशनल असेंबली दोनों में दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत की जरूरत होती है। यह काम बहुत मुश्किल है क्योंकि पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) किसी भी हालत में सिंध का बंटवारा नहीं होने देगी। ऐसे में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का रुख अहम होगा। इमरान खान की पार्टी का सेना को संर्थन फिलहाल बेहद मुश्किल लगता है।
सेना को क्या फायदा होगा
सवाल ये है कि असीम मुनीर विरोध के बावजूद क्यों प्रांत बांटना चाहते हैं। दरअसल सेना को संगठन के तौर पर इससे फायदा होगा। पाकिस्तान के नौ कोर कमांड अभी देश की मौजूदा प्रांतीय सीमाओं के हिसाब से हैं। इसमें पंजाब में तीन कमांड- रावलपिंडी, मंगला और मुल्तान में हैं। चार प्रांतों को बीस या तीस प्रशासनिक इकाइयों में बांटने पर सेना को देखरेख के लिए नए थ्री-स्टार कमांड की जरूरत होगी। यह मेजर जनरलों के लिए प्रमोशन के नए मौके खोलने का एक आसान तरीका होगा।