नई दिल्ली: यह कहानी सूरत के एक कपल की है। इनके नाम हैं – सूर्वी राठी मेंदपारा और क्रुणाल मेंदपारा। इन दोनों ने अलग सोच के साथ अपने काम की शुरुआत की। बच्चों के कपड़ों में फैशन के बजाय पति-पत्नी ने सहूलियत, सुरक्षा और आराम को प्राथमिकता दी। पढ़ाई के दौरान मिले इस कपल ने साल 2021 में अपने स्टार्टअप की नींव रखी। इसका नाम कोकून केयर (Cocoon Care) है। कॉटन के विकल्प के तौर पर दोनों ने इको-फ्रेंडली ‘बैम्बू फैब्रिक’ (बांस के कपड़े) को चुनकर नया ट्रेंड सेट किया। आज यह स्टार्टअप करोड़ों की कमाई कर रहा है। आइए, यहां सूर्वी राठी मेंदपारा और क्रुणाल मेंदपारा की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
सूर्वी और क्रुणाल की मुलाकात एमबीए की पढ़ाई के दौरान हुई थी। 2015 में डिग्री पूरी करने के बाद सूर्वी ने मार्केटिंग और मेक-अप आर्टिस्ट के रूप में काम किया। क्रुणाल फाइनेंस एनालिस्ट बने। 2018 में शादी के बाद दोनों के बिजनेस बैकग्राउंड ने उन्हें खुद का काम शुरू करने के लिए प्रेरित किया। बड़ों के कपड़ों के बाजार में बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा देखकर उन्होंने बेबीवेयर (बच्चों के कपड़े) सेगमेंट पर फोकस किया। उनका मानना था कि नवजात शिशुओं को दिन में दर्जनों बार कपड़े बदलने पड़ते हैं। इसलिए बच्चों के कपड़ों में स्टाइल से ज्यादा उनकी उपयोगिता सर्वोपरि होनी चाहिए।
कॉटन का बेहतर और सुरक्षित विकल्प तलाशते हुए क्रुणाल को ‘बैम्बू फैब्रिक’ के बारे में पता चला। यह हाइपोएलर्जेनिक और इको-फ्रेंडली था। उस समय भारत में बैम्बू फैब्रिक से बने बेबीवेयर का ट्रेंड नहीं था। शुरुआती निवेश करते हुए उन्होंने चीन के अलीबाबा से कपड़ा मंगवाया। सैंपल तैयार कराए। जब वह मुंबई के रिटेलर्स के पास गए तो सबने उनके महंगे दाम और अनजान ब्रांड का हवाला देकर रिजेक्ट कर दिया। लेकिन, परिवार से मिले सकारात्मक फीडबैक ने उनका हौसला बनाए रखा। उन्होंने 2021 के लॉकडाउन में सीधे ऑनलाइन (D2C) अपनी वेबसाइट के जरिए उत्पाद बेचना शुरू किया।
नवजात बच्चों के माता-पिता की सबसे बड़ी समस्या ‘बच्चों की नींद’ को ध्यान में रखकर ब्रांड ने अपने 80% रेवेन्यू का बेस स्लीप प्रोडक्ट्स को बनाया। सूर्वी और क्रुणाल ने बच्चों के विकास के अलग-अलग चरणों के हिसाब से तीन मुख्य स्लीपवेयर लॉन्च किए। इनमें Upzie (न्यूबॉर्न के लिए), Snugzie (करवट लेने वाले बच्चों के लिए) और Sackie (पहने जाने वाले कंबल) शामिल थे। इसके अलावा, उन्होंने जेंडर-न्यूट्रल कलर में रोजमर्रा के टी-शर्ट, पजामा और न्यूबॉर्न एसेंशियल बनाए। माता-पिता की सुविधा के लिए जिपर में डबल-साइड जिप दिए गए ताकि डायपर बदलना आसान हो सके। क्वालिटी बनाए रखने के लिए उन्होंने सूरत में अपनी खुद की स्टिचिंग यूनिट लगाई।
अब करोड़ों का कारोबार
मार्केटिंग और सोशल मीडिया के जरिए बैम्बू बनाम कॉटन के फायदों को समझाकर ब्रांड ने तेजी से अपनी पहचान बनाई। औसतन 2,600 रुपये के ऑर्डर वैल्यू के साथ ब्रांड अब तक 60,000 से अधिक ग्राहकों को अपनी सेवाएं दे चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 4 करोड़ रुपये के रेवेन्यू के साथ कंपनी का सालाना रन-रेट अब 8 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। अब यह ब्रांड समय से पहले जन्मे बच्चों (प्रिमेच्योर बेबीज) और एनआईसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं के लिए विशेष सुरक्षित कपड़े डिजाइन करने में जुटा हुआ है।