नई दिल्ली: स्मार्टफोन और पैसेंजर वीकल्स की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण बड़ी संख्या में भारतीय कंस्यूमर्स अब रीफर्बिश्ड और सेकंड हैंड सामानों की ओर रुख कर रहे हैं। मोबाइल फोन बिक्री पर नजर रखने वाली संस्था काउंटरपॉइंट्स रिसर्च के अनुसार इस साल जनवरी से मई के दौरान कुल स्मार्टफोन बिक्री में रीफर्बिश्ड और प्री-ओन्ड डिवाइसों की हिस्सेदारी 26% रही, जबकि पिछले साल इसी समय में यह करीब 23% थी। रिसर्च फर्म का कहना है कि कोविड काल को छोड़ दें तो यह बाजार सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। ऑटोमोबाइल्स में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला है। क्रिसिल रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में सेकंड हैंड कारों की बिक्री 9% बढ़कर 61 लाख यूनिट पर पहुंच गई, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 56 लाख यूनिट थी। इसके मुकाबले नई कारों की बिक्री 8% बढ़कर 46.4 लाख यूनिट रही। नई कारों की बिक्री को सितंबर में जीएसटी रेट्स में कटौती से कुछ सहारा मिला।
क्यों बढ़ी बिक्री?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, नवंबर के बाद से स्मार्टफोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसकी बड़ी वजह मेमोरी चिप्स की कीमतों में दो से तीन गुना तक बढ़ोतरी है। AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण इन चिप्स की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि इस समय में कुछ हैंडसेट की कीमतों में औसत बढ़ोतरी 30 से 35% के बीच रही है।