मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने पर केंद्र ने रोकी रफ्तार, पहले मौजूदा लक्ष्य पूरा करने की दी सलाह

 मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ने किसानों की बढ़ती संख्या और उत्पादन का हवाला देते हुए मूंग खरीदी का कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत क

ने की मांग की है।

हालांकि, केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार करने के बजाय पहले स्वीकृत लक्ष्य के अनुरूप खरीदी पूरी करने पर जोर दिया है। केंद्र का कहना है कि राज्य को पहले ही देश में सबसे अधिक कोटा दिया गया है और अतिरिक्त प्रस्ताव पर मौजूदा लक्ष्य पूरा होने के बाद ही विचार किया जाएगा।

राज्य सरकार ने 40 फीसदी कोटा करने की मांग उठाई

  • मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य में बड़ी संख्या में किसानों ने मूंग बेचने के लिए पंजीयन कराया है।
  • अनुमान है कि इस बार करीब 10 लाख टन मूंग खरीदी के लिए आ सकती है। ऐसे में मौजूदा 25 प्रतिशत की सीमा पर्याप्त नहीं होगी। मंत्री ने मांग की है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी खरीदी का दायरा बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाए, जिससे अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिल सके।

केंद्र का जवाब- पहले स्वीकृत लक्ष्य पूरा करें

  • केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने जवाब में कहा कि ग्रीष्मकालीन सीजन 2026-27 के लिए मध्यप्रदेश को पहले ही 4.54 लाख टन से अधिक मूंग खरीदने की अनुमति दी जा चुकी है।
  • मंत्रालय ने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल मूंग खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्यप्रदेश को मिला है। केंद्र के अनुसार अतिरिक्त कोटे पर तभी विचार किया जाएगा, जब राज्य पहले स्वीकृत मात्रा की खरीदी पूरी कर लेगा।
  • हालांकि राज्य के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक 52,284 किसानों से 36,682 टन मूंग खरीदी जा चुकी है और 10 अगस्त तक खरीदी की प्रक्रिया जारी रहेगी।
  • पुराना स्टॉक बना सरकार के लिए बड़ी चुनौती

    • मूंग खरीदी बढ़ाने की मांग के बीच राज्य सरकार के सामने पुराना स्टॉक भी बड़ी समस्या बना हुआ है। मार्कफेड के गोदामों में पिछले वर्षों की खरीदी गई बड़ी मात्रा अब भी रखी हुई है। पिछले सीजन में निर्धारित कोटे से करीब 3.5 लाख टन अधिक खरीदी की गई थी।
    • अब इस स्टॉक को खुले बाजार में बेचने की तैयारी है, जिससे राज्य सरकार को करीब 3,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
    • जानकारी के मुताबिक मूंग की खरीदी लगभग 8,500 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की गई थी, जबकि भंडारण और अन्य खर्च जोड़ने पर इसकी लागत करीब 9,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच रही है। वहीं खुले बाजार में बिक्री आमतौर पर इससे 20 से 30 प्रतिशत कम कीमत पर होती है।
    • पहले भी भेजे जा चुके हैं प्रस्ताव

      • मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने के लिए केवल कृषि मंत्री ही नहीं, बल्कि इससे पहले राज्य के अधिकारियों की ओर से भी केंद्रीय कृषि मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
      • राज्य सरकार का तर्क है कि मध्यप्रदेश में हर साल 18 से 20 लाख टन तक ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन होता है। ऐसे में सीमित कोटा होने से बड़ी संख्या में किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पाता।
      • अब किसानों की नजर इस बात पर टिकी है कि मौजूदा खरीदी पूरी होने के बाद केंद्र अतिरिक्त कोटा मंजूर करता है या नहीं। यदि ऐसा होता है तो हजारों किसानों को अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिल सकता है।
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