भोपाल। स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर जिला मुख्यालयों पर होने वाले कार्यक्रमों में प्रभारी मंत्री विकास कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करेंगे। यह एक तरह से विकास कार्यों के सोशल ऑडिट जैसा होगा। विधायक निधि से सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं।
किफायती आवासों के निर्माण में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के उपयोग को बढ़ावा दें। विभागवार, संभागवार और जिलावार समस्त आंकड़े एक ही प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराए जाएं। यह निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा के दौरान दिए।उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र विकास योजना में सभी विभागों की गतिविधियों पर ध्यान दिया जाए। ऐसा ना हो कि जो काम कराए गए हैं, उन्हें बाद में कोई देखे तक नहीं। चूंकि, विधायक निधि लैप्स नहीं होती और अगले साल बढ़ जाती है, इसलिए उसका उपयोग न करके एकसाथ किया जाए, यह प्रवृत्ति नहीं होनी चाहिए। मृत्यु पंजीयन के लिए विश्राम घाट पर ही व्यवस्था बनाने की कार्य योजना बनाएं। हर जिले का विकास सूचकांक एक नहीं हो सकता है।
किसी जिले में जंगल तो किसी में खदान, उद्योग और कहीं खेती, इसलिए यह अलग-अलग निर्धारित किया जाए। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक एक लाख 37 हजार से अधिक छात्र लाभांवित हो चुके हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवांकुर समितियों ने कुएं, बावड़ी, तालाब, नदी घाट सफाई, जल संगोष्ठी और बावड़ी उत्सव में सहभागिता की है।
मछली पालन के लिए प्रदेश में होगा नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश
मुख्यमंत्री ने छुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के कारण प्रदेश में मछली पालन क्षेत्र में नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ रहा है। प्रदेश में मोती उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाए, इसके लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस का अध्ययन कर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।
अगले ढाई साल में हमें मछली बीज अन्य स्थानों से नहीं खरीदना पड़े, इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर विभाग काम करे। हर जिले में एक हेचरी आवश्यक रूप से विकसित की जाए। प्रदेश में बढ़ रहे मछली उत्पादन को दृष्टि में रखते हुए कोल्ड चेन तथा अन्य आवश्यक इंफ्रास्टक्चर विकसित किया जाए।
ब्रांडिंग और निर्यात के लिए आवश्यक नेटवर्किंग को भी प्रोत्साहित करें। जलीय ईको सिस्टम को विकसित करने और जल संपदा पर आधारित पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने की भी कार्य योजना बनाई जाए।