स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने ‘जम्प डिपॉजिट स्कैम’ नाम के एक नए ऑनलाइन फ्रॉड से अलर्ट किया है। बैंक का कहना है कि अगर आपके खाते में अचानक बिना किसी वजह के पैसे आ जाएं, तो सावधान हो जाएं और किसी भी अनजान पेमेंट रिक्वेस्ट को अप्रूव न करें।
SBI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर कर बताया कि ठग सबसे पहले आपके अकाउंट में छोटे-मोटे पैसे भेजकर भरोसा जीतते हैं। इसके बाद, पैसे गलती से आने का बहाना बनाकर आपको झांसे में लेते हैं और UPI के जरिए आपके खाते से मोटी रकम निकाल लेते हैं।
- खाते में पैसे आना: साइबर फ्रॉड आपके अकाउंट में अचानक ₹100, ₹500 या ₹1,000 जैसी छोटी रकम ट्रांसफर करते हैं।
- इमोशनल कॉल/मैसेज: फिर तुरंत फोन करके अस्पताल या किसी एक्सीडेंट की मजबूरी बताकर पैसे लौटाने की गुहार लगाते हैं।
- फर्जी UPI रिक्वेस्ट: पैसे वापस मांगने के लिए वह आपको क्यूआर कोड या ‘पेमेंट कलेक्ट रिक्वेस्ट’ भेजता है।
- खाता खाली होना: जैसे ही आप पैसे लौटाने के लिए UPI पिन डालते हैं, आपके खाते से बड़ा अमाउंट कट जाता है।
SBI की चेतावनी कहा कि बिना वजह खाते में आया पैसा एक जाल हो सकता है, ऐसे किसी भी झांसे में न आएं।
साइबर ठगी से बचने के लिए SBI की 3 सेफ्टी टिप्स
- ब्लॉक करें और तुरंत रिपोर्ट कराएं: ऐसा कोई भी कॉल या मैसेज आते ही उस नंबर को ब्लॉक करें। इसकी शिकायत अपने बैंक और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत करें।
- किसी भी दबाव में न आएं: मजबूरी या इमोशनल ब्लैकमेल का हवाला देकर भेजी गई किसी भी अनजान UPI रिक्वेस्ट या QR कोड को बिना जांचे-परखे कभी भी एक्सेप्ट न करें।
- कॉलर की पहचान जरूर जांचें: बैंक से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ उन्हीं कॉल्स पर भरोसा करें जो 1600 से शुरू होते हैं। SBI के मुताबिक, 1600 वाले नंबर ही बैंक की ओर से आने वाले ऑफिशियल और सुरक्षित कॉल्स होते हैं।
नॉलेज बॉक्स: UPI पिन सिर्फ पैसे भेजने के लिए होता है
किसी भी बैंक खाते में पैसे रिसीव करने के लिए कभी भी UPI पिन डालने या किसी QR कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं होती है। अगर कोई आपको पैसे भेजने का दावा कर रहा है और पिन डालने को कह रहा है, तो समझ जाएं कि यह फ्रॉड है।