नई दिल्ली: इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के यूज को लेकर पिछले कुछ समय से पूरे देश में बहस चल रही है। कुछ लोगों का दावा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज प्रभावित हो रहा है और इंजन में खराबी आ रही है। हालांकि सरकार ने इन दावों का खंडन किया है। इस बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने देश में पुरानी गाड़ियों के लिए E20 के साथ-साथ E10 पेट्रोल को फिर से शुरू करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि कम ब्लेंड वाला पेट्रोल पुराने दोपहिया वाहनों को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
नागेश्वरन ने एक लेख में कहा कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने की चिंताएं उपलब्ध सबूतों से साबित नहीं होती हैं। इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में लगभग दो-तिहाई ऊर्जा होती है। इसका मतलब है कि E20 के इस्तेमाल से ऊर्जा में 7 प्रतिशत तक की कमी आती है। उन्होंने साथ ही कहा कि अमेरिका और भारत में हुई टेस्टिंग में उन वाहनों में कोई ज्यादा टूट-फूट नहीं पाई गई जो E20 के लिए नहीं बने थे।
किसे होगा फायदा?
हालांकि, उन्होंने एक वास्तविक चिंता की ओर इशारा किया जो BS4 से पहले बने लगभग 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहनों से जुड़ी है, जिनमें कार्बोरेटर का इस्तेमाल होता है। CEA ने बताया कि देश में BS4 से पहले बने लगभग 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन हैं जो कार्बोरेटर पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि कार्बोरेटर ब्लेंड में मौजूद अतिरिक्त ऑक्सीजन को भांप नहीं पाता और उसके अनुसार खुद को एडजस्ट नहीं कर पाता। इसलिए जब उसे E20 पर चलाया जाता है तो इंजन हवा के मुकाबले बहुत कम ईंधन खींचता है और ज्यादा गर्म हो जाता है।
कहां गया E10?
उन्होंने कहा, ‘मूल रोडमैप में इस बात का ध्यान रखा गया था और यह सुझाव दिया गया था कि इन वाहनों के लिए कम ब्लेंड वाला ईंधन बिक्री के लिए उपलब्ध रहे, लेकिन वह ईंधन चुपचाप पंपों से गायब हो गया और उसे वापस लाने की जरूरत है। पंपों पर कम ब्लेंड वाले ईंधन को विकल्प के तौर पर फिर से शुरू करने से लोगों की ज्यादा चिंताएं दूर हो जाएंगी। इथेनॉल का कुल इस्तेमाल बढ़ने के बजाय कम होगा और रेट्रोफिट प्रोग्राम के आगे बढ़ने तक मौजूदा वाहनों के बेड़े की सुरक्षा होगी।’