नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने मंगलवार को राज्यसभा की 12 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा की। अगर आखिरी समय में कोई अप्रत्याशित राजनीतिक गठबंधन नहीं होता है, तो BSP 1989 के बाद पहली बार संसद में बिना किसी प्रतिनिधित्व के रह जाएगी। दरअसल उसके एकमात्र सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा है।
जिन सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर और अरुण सिंह (सभी BJP से); और SP के रामगोपाल यादव शामिल हैं। पुरी का मंत्रियों की परिषद में एकमात्र सिख होना और वर्मा का लोध (UP के कुछ हिस्सों में एक प्रभावशाली OBC जाति) होना उनके पक्ष में जा सकता है, क्योंकि अगले साल की शुरुआत में पंजाब और UP दोनों में चुनाव होने हैं।
उत्तराखंड और बंगाल में भी सियासी समीकरण पर नजर
उत्तराखंड में एक सीट खाली होगी, जबकि बंगाल में TMC सदस्य रुक्मिणी मल्लिक के इस्तीफे के कारण उपचुनाव होगा। BJP पहाड़ी राज्य में अपनी सीट बनाए रखने और बंगाल में तृणमूल की कीमत पर बढ़त हासिल करने की स्थिति में है। UP में, BJP के 8 सीटें बनाए रखने की संभावना है, जबकि SP को दो सीटें मिल सकती हैं। नॉमिनेशन फाइल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है। अगर खाली सीटों की संख्या से ज़्यादा उम्मीदवार मैदान में हुए, तो चुनाव 16 अक्टूबर को होंगे।
BSP के सामने संसद से पूरी तरह बाहर होने का संकट
UP में मायावती के नेतृत्व वाली BSP का प्रभाव कम हो रहा है। यह एकमात्र ऐसा राज्य है जहां 1989 में दो लोकसभा सीटें जीतने के बाद से वह एक बड़ी ताकत रही है, लेकिन 2014 में BJP के उभार के साथ उसका पतन शुरू हुआ और अब पार्टी को संसद से पूरी तरह बाहर होने की शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है।