भोपाल में यतीमखाने की 2.7 एकड़ जमीन पर घमासान

भोपाल, भोपाल के शाहजहांनाबाद स्थित दारुल शफकत यतीमखाने की करीब 2.7 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड संपत्ति को 1961 से गजट नोटिफाइड वक्फ संपत्ति बताते हुए दारुल शफकत सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शाहिद अलीम खान समेत अन्य के खिलाफ FIR करा चुका है।

बोर्ड का आरोप है कि वक्फ संपत्ति को अपना बताकर भवन निर्माण की अनुमति ली गई, जमीन का हिस्सा जीवन रेखा अस्पताल को किराए पर दिया गया और उससे करीब 2.26 करोड़ रुपए की आय हुई, जिसका पूरा हिसाब बोर्ड को नहीं दिया गया।

इधर, दारुल शफकत सोसायटी ने अब जीवन रेखा अस्पताल प्रबंधन पर यतीमखाने के एक हिस्से में रात के समय ताला लगाने, पानी की मोटर और टैंक तक पहुंच रोकने और गरीब महिलाओं के सिलाई सेंटर का सामान बाहर निकालकर उस हिस्से पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। इसका सीसीटीवी भी सामने आया है।

सोसायटी का कहना है कि ताला लगने से यतीमखाने में रह रहे करीब 98 बच्चों की पानी की व्यवस्था प्रभावित हुई है और अब टैंकर से पानी मंगाना पड़ रहा है।

सबसे पहले समझिए क्या है पूरा विवाद

वक्फ बोर्ड के अनुसार संपत्ति ‘वक्फ इदारा यतीम खाना शाहजहानी’ के नाम पर दर्ज है और करीब 2.7 एकड़ में फैली है। बोर्ड का कहना है कि यह संपत्ति 1961 में गजट नोटिफाइड हुई थी और अब UMEED पोर्टल पर भी दर्ज है।

बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल का आरोप है कि दारुल शफकत सोसायटी ने संपत्ति के एक हिस्से पर भवन बनाकर जीवन रेखा अस्पताल को किराए पर दिया। भवन निर्माण की अनुमति लेते समय सोसायटी के पदाधिकारियों ने खुद को संपत्ति का मालिक बताते हुए शपथ पत्र दिए, जबकि बोर्ड के रिकॉर्ड में जमीन वक्फ के नाम दर्ज है।

अस्पताल से 2.26 करोड़ रुपए मिलने का आरोप

वक्फ बोर्ड का आरोप है कि जुलाई 2011 से मई 2025 तक अस्पताल से करीब 1 करोड़ 96 लाख रुपए किराया और 30 लाख रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में मिले। यानी कुल करीब 2.26 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, लेकिन इसका समुचित हिसाब वक्फ बोर्ड को नहीं दिया गया।

बोर्ड का कहना है कि मामले में 28 करोड़ 91 लाख रुपए की आरआरसी भी जारी की गई है और कथित वित्तीय क्षति की रिकवरी कलेक्टर के माध्यम से संबंधित लोगों की चल-अचल संपत्तियों से की जाएगी।

बोर्ड का दावा- 20 साल से आय का पूरा हिसाब नहीं

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल के अनुसार शाहिद अलीम खान को 2005 में नई समिति बनने तक संपत्ति के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी। उनका आरोप है कि इसके बाद करीब 20 साल से वक्फ संपत्ति से होने वाली आय का पूरा हिसाब बोर्ड को नहीं दिया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संपत्ति पर होने वाले इस्तेमा बाजार से सालाना करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपए की आय होती रही, जिसका भी समुचित हिसाब नहीं दिया गया। हालांकि दारुल शफकत सोसायटी इन आरोपों से इनकार करती है।

अब अस्पताल पर ताला लगाने का आरोप

FIR के बाद सामने आए नए घटनाक्रम में दारुल शफकत सोसायटी ने जीवन रेखा अस्पताल प्रबंधन पर यतीमखाने के एक हिस्से में रात के समय ताला लगाने का आरोप लगाया है।

कार्यकारिणी सदस्य परवेज खान के अनुसार अस्पताल संचालक डॉ. फरीद शेख की ओर से करीब 30-40 लोग वहां पहुंचे। आरोप है कि नीचे के उस हिस्से का ताला तोड़ा गया, जहां सोसायटी का सिलाई सेंटर और कार्यकारिणी की बैठकें होती थीं।

सोसायटी का आरोप है कि वहां रखा सामान बाहर निकाल दिया गया और अस्पताल का खराब व कंडम सामान अंदर रखकर दोबारा ताला लगा दिया गया। परवेज खान का कहना है कि इस घटना के CCTV फुटेज भी संस्था के पास हैं।

Spread the love