बालिका गृह से दो साल में गायब हो गईं 5 मासूम; इटारसी पुलिस ने अब दर्ज किए अपहरण के केस, तलाश में जुटी साइबर सेल और SIT

इटारसी । बेसहारा एवं लावारिश बच्चियों के लिए संचालित मुस्कान बालिका गृह से पिछले दो सालो में लापता हुई पांच किशोरियों के मामले में समय पर एफआईआर और जांच शुरु न होने के मामले में पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा एस थोटा ने जांच समिति का गठन कर दिया है।एक दिन पहले इस मामले का पर्दाफाश होने के बाद शनिवार को जांच समिति ने संस्था पहुंचकर दस्तावेज खंगालकर संचालिका समेत प्रबंधन से पूछताछ की है।

एसआईटी करेगी मामले की जांच

एसपी ने बताया कि पांच नाबालिग बालिकाओं के लापता होने के मामले में पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना की सूचना मिलने के बाद थाना इटारसी में पांच अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं। बालिकाओं की तलाश के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया है।
पुलिस के अनुसार 17 जुलाई को मुस्कान बालिका गृह से पांच नाबालिग बालिकाओं के गुमशुदा होने की सूचना प्राप्त हुई। इस आधार पर थाना इटारसी में पांच अलग अलग मामले दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक साई कृष्णा एस थोटा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन, एसडीओपी वीरेंद्र मिश्रा, थाना प्रभारी सौरभ पांडे, महिला थाना प्रभारी निरीक्षक राखी मौर्य एवं पथरौटा थाना प्रभारी उपनिरीक्षक मोनिका गौर ने मुस्कान बालिका गृह पहुंचकर यहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और आवश्यक जानकारी जुटाई।

नहीं मिले गुमशुदगी के दस्तावेज

जांच के दौरान पुलिस को संस्था की ओर से बालिकाओं की गुमशुदगी की सूचना देने संबंधी कोई दस्तावेज या तथ्य उपलब्ध नहीं मिले। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन के नेतृत्व एवं एसडीओपी वीरेंद्र मिश्रा के पर्यवेक्षण में एक निरीक्षक एवं तीन उपनिरीक्षकों की विशेष जांच टीम गठित की गई है।
पुलिस का कहना है कि साइबर सेल और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से बालिकाओं की शीघ्र बरामदगी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। मामले की जांच जारी है। पता चला है कि कुछ लड़कियां स्टेशन पर हो सकती हैं।

भाजपा नेता की है संस्था

इस संस्था का संचालन एवं प्रबंधन भाजपा नेता एवं पार्षद पति मनीष ठाकुर करते हैं। ठाकुर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में सपोर्ट पर्सन के रूप में भी नियुक्त हैं।
ठाकुर का कहना है कि बच्चियों के लापता होने के मामलों में पुलिस को सूचना दी जाती रही। हमने हर घटना की सूचना समय पर पुलिस को दी थी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। कलेक्टर, एसपी और बाल कल्याण समिति की बैठक में यह मुद्दा उठने के बाद केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

सामने आई पुलिस की लापरवाही

थाना प्रभारी सौरभ पांडेय ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले की चार्ज लिया है। प्रकरण सामने आते ही तत्काल एफआईआर कराई गई हैं, साथ ही गुम हुई बच्चियों की तलाश शुरू कर दी गई है। नर्मदापुरम एसपी सांई कृष्णा एस थोटा के मुताबिक बच्चियों के गायब होने के मामले में एफआईआर तत्काल होनी चाहिए थी, तब एफआईआर क्यों नहीं कराई गई।
तत्कालीन पुलिस अधिकारियों या संस्था के स्तर पर किसी भी रूप में लापरवाही हुई, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।
पुलिस के अनुसार संस्था परिसर से 10 जुलाई 2024 को 17 वर्षीय लड़की लापता हुई, इसके बाद 25 दिसंबर 2025 को एक साथ तीन नाबालिग लड़कियां गायब हुईं। 14 जून 2026 को भी 13 वर्षीय बच्ची लापता होने का मामला सामने आया। जिला स्तरीय बैठक में मुद्दा उठने के बाद 17 जुलाई को थाने में सभी मामलों में गुमशुदगी और अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया।

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