आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा, रायसेन के प्राइवेट हॉस्पिटल ने 29 मरीजों को जबरन 7 दिन भर्ती रखा, इलाज मिला नहीं, पैसा काटे

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बाद अब रायसेन जिले में भी आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जी क्लेम का बड़ा मामला सामने आया है। यहां के मंडीदीप स्थित एक निजी अस्पताल पर आरोप है कि उसने गांवों में बकायदा स्वास्थ्य शिविर लगाकर मामूली बीमारियों वाले मरीजों को खोजा।

उसके बाद सरकारी क्लेम हासिल करने के लिए बेवजह सात दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखा। मरीजों ने कहा कि उन्हें इलाज का कोई फायदा नहीं मिला, जबकि उनके आयुष्मान कार्ड से पैसे कट गए

स्वास्थ्य शिविर की आड़ में मरीजों की तलाश

  • रायसेन जिले के सांचेती और आसपास के गांवों में अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्वास्थ्य शिविर लगाए थे। ग्रामीणों के मुताबिक, 15 जुलाई को पंचायत भवन में कैंप लगा, जहां लोगों की जांच के साथ-साथ उनके आयुष्मान कार्ड भी वेरिफाई किए।
  • उसके बाद बीपी, शुगर, घुटनों के दर्द और कम सुनाई देने जैसी आम समस्याओं वाले 17 मरीजों को एक ही दिन गाड़ी में भरकर मंडीदीप के ‘सार्थक मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल’ ले गए। इसके अगले दिन विशनखेड़ी में भी ऐसा ही शिविर लगाकर करीब 12 लोगों को अस्पताल ले जाया गया।
  • फर्जी क्लेम पास कराने के लिए 7 दिन तक रोके रखा

    • मरीजों को अस्पताल में बिना गंभीर बीमारी के भी हफ्तों तक भर्ती रखा। दरअसल, आयुष्मान योजना के नियमों के मुताबिक, क्लेम क्लीयर कराने के लिए मरीजों की दैनिक निगरानी और न्यूनतम भर्ती का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी होता है।
    • एक या दो दिन में छुट्टी देने पर नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) या एंटी-फ्रॉड टीम क्लेम रिजेक्ट कर सकती है, इसलिए अस्पताल प्रबंधन कागजों पर ‘गंभीर इलाज’ दिखाने के लिए मरीजों को जबरन 5 से 7 दिन रोककर रखता है, जिससे 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक का पूरा पैकेज आसानी से हासिल किया जा सके।

    न इलाज मिला, न आसानी से मिली छुट्टी

    • अस्पताल में भर्ती किए गए मरीजों का अनुभव बेहद निराशाजनक रहा। 85 वर्षीय भगवती बाई को महज घुटनों और हाथ-पैर दर्द की शिकायत पर आठ दिन तक अस्पताल में रखा गया। सांस की बीमारी से पीड़ित 70 वर्षीय मातादीन राजपूत को बड़ी मुश्किल से अस्पताल से छुट्टी मिल सकी।
    • जशोदाबाई केवट ने कहा कि उन्हें घुटने में दर्द और कम सुनाई देने की समस्या थी, लेकिन अस्पताल में इतने दिन गुजारने के बाद भी उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ। क्लेम की अवधि पूरी होने के बाद अस्पताल ने सभी को छुट्टी देकर वापस उनके गांव छोड़ दिया।

    आरोपियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

    वहीं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों ने मामले को गंभीर बताया है। मामले की जांच कर नियम अनुसार कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।

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