भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा से पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति मिलने से पहले राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कानूनी सलाह मांगी है। विधेयक को लोकभवन की विधि एवं विधायी शाखा भेजा गया है। यहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की अनुमति के लिए भेजा जाएगा
राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजा जाएगा विधेयक
- मध्य प्रदेश विधानसभा से पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को अनुमति देने से पहले राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कानूनी सलाह मांगी है। उन्होंने इसे लोकभवन की विधि एवं विधायी शाखा को भेजा है।
- यहां से हरी झंडी मिलने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की अनुमति के लिए भेजा जाएगा, क्योंकि इसके कई प्रविधान भारत सरकार के विभिन्न कानूनों से संबंधित हैं।
- बता दें कि इसमें बहुविवाह और निकाह हलाला पर पूरी तरह से रोक लगाने के साथ ही विवाह और तलाक व लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर प्रविधान किए गए हैं। राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद यह कानून के रूप में राज्य में लागू हो जाएगा।
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21 जुलाई को विधानसभा में पारित हुआ था विधेयक
- मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने गत 19 जुलाई को विधेयक के प्रारूप को स्वीकृति दी और विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया गया। 21 जुलाई को मध्य प्रदेश विधानसभा ने विपक्ष की गैर मौजूदगी में यूसीसी विधेयक ध्वनिमत से पारित कर विधि एवं विधायी विभाग के माध्यम से छह अगस्त को राज्यपाल को अनुमति के लिए भेजा था।
- उन्होंने इसे विधिक अभिमत के लिए अपनी विधि एवं विधायी शाखा को भेजा। यहां इसके प्रविधानों का परीक्षण करने के बाद राज्यपाल के अभिमत से राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। विधि एवं विधायी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा संवैधानिक और विभिन्न कानूनों के प्रविधानों का परीक्षण कराकर अनुमति देने या वापस लौटाने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
- चूंकि, उत्तराखंड में कानून लागू हो चुका है, इसलिए संभावना है कि इसे जल्द अनुमति मिल जाएगी। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव भी इसके लिए प्रयास करेंगे। देश में अब तक उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू कर चुका है। वहीं, गुजरात ने विधानसभा से विधेयक पारित कर भारत सरकार को अनुमति के लिए भेज दिया है। वहां यह अभी लंबित है। असम में भी यूसीसी से जुड़ी प्रक्रिया जारी है।