महिला वकील संग दिल्‍ली पुलिस का बर्ताव देख भड़कीं गुल पनाग, प्रदर्शन का विरोध करने वाले को लोकतंत्र का पढ़ाया पाठ

दिल्‍ली में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया विवाद, और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। इस बीच लगातार दिल्‍ली पुलिस और तैनात जवानों पर प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता के आरोप लग रहे हैं। सोमवार को इस विरोध प्रदर्शन में सुप्रीम कोर्ट के वकील भी शामिल हुए। कई ऐसे वीडियोज सामने आए हैं, जिनमें पुलिस बल की ज्‍यादती दिख रही है। सड़कों पर हाल देख बॉलीवुड एक्‍ट्रेस गुल पनाग ने X पर प्रदर्शन का विरोध करने वालों को लोकतंत्र और संविधान का पाठ पढ़ाया है। उन्‍होंने सबसे पहले एक महिला वकील का वीडियो शेयर किया, जिसके पुलिस जबरन गाड़ी में बिठाने की कोश‍िश कर रही है। एक्‍ट्रेस ने दो टूक शब्‍दों में कहा कि वह इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में हैं।

‘द फैमिली मैन’ सीरीज और ‘डोर’ जैसी फिल्‍म में नजर आ चुकी गुल पनाग ने इससे पहले जुलाई में भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। अब जब CEC ज्ञानेश कुमार के इस्‍तीफे की मांग हो रही है, तो 47 साल की एक्‍ट्रेस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को जनता का अध‍िकार बताया है। यही नहीं, उन्‍होंने एक यूजर के कमेंट पर भी जवाब दिया है, जिसने कहा कि वह ‘बेमतलब के विरोध-प्रदर्शनों’ के ख‍िलाफ हैं।

गुल पनाग ने शेयर किया वीडियो, कहा- ऐसा बर्ताव का क्या औचित्य?

गुल पनाग ने सोमवार शाम को सबसे पहले एक महिला वकील का वीडियो शेयर किया और लिखा, ‘ये मेरी दोस्त स्‍वाति एस मलिक हैं, जो एक वकील हैं। वे अपने साथी वकीलों के साथ शांतिपूर्ण विरोध का अपना संवैधानिक अधिकार इस्तेमाल कर रही हैं। उन्हें अलग-थलग किया जा रहा है और जबरदस्ती गाड़ी में बिठाने की कोशिश की जा रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के साथ ऐसा बर्ताव करने का क्या औचित्य हो सकता है?’

‘लोगों के जायज गुस्से को न मानना ​​सही नहीं’

साल 1999 में मिस इंडिया यूनिवर्स का ताज जीत चुकीं गुल पनाग ने आगे सत्ता में बैठे राजनेताओं पर निशाना साधा और कहा, ‘ऐसी बात का बचाव करना, जिसका बचाव नहीं किया जा सकता, न तो मजबूती की निशानी है और न ही लोगों के जायज गुस्से को नहीं मानना ​​सही है। यह इस बात की निशानी है कि आप उन लोगों को भूल रहे हैं जिनके प्रति आप जवाबदेह हैं।’

गुल पनाग बोलीं- चुप रहना भी अपने आप में एक रुख अपनाना है

एक्‍ट्रेस ने आगे लिखा, ‘अब समय आ गया है कि जो लोग तटस्थ बने हुए हैं या जो सोच-समझकर राजनीतिक नफा-नुकसान का हिसाब लगा रहे हैं, वे अपनी बात रखें। चुप रहना भी अपने आप में एक रुख अपनाना ही है। मैं शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का पूरी तरह से समर्थन करती हूं और इसे दबाने के लिए सरकारी ताकत के इस्तेमाल के खिलाफ हूं।’

यूजर ने कहा- हम प्रदर्शन के ख‍िलाफ! गुल पनाग ने पढाया संविधान का पाठ

गुल पनाग के इस ट्वीट पर एक यूजर ने कमेंट किया और कहा, ‘हम तटस्थ नहीं हैं। हम बेमतलब के विरोध-प्रदर्शनों के खिलाफ हैं…’ इस पर एक्‍ट्रेस ने सरकारी तंत्र, लोकतंत्र और संविधान का पाठ पढ़ा दिया। कहा, ‘ओहो, हो सकता है कि आप उनके विरोध के मुद्दे से सहमत न हों। यह पूरी तरह से आपका अधिकार है। लेकिन उनके विरोध करने का अधिकार आपकी, मेरी या सरकार की मंजूरी पर निर्भर नहीं करता। असल बात तो यही है। नागरिकों को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए संविधान में आम मंजूरी की जरूरत नहीं होती।’

गुल पनाग ने पूछा- विरोध का ‘विपक्ष से प्रेरित’ होना अयोग्य कैसे हो गया?

एक्‍ट्रेस ने शाम को इस बाबत अपने आख‍िरी पोस्‍ट में उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो इस विरोध प्रदर्शन को विपक्षी दलों से प्रेरित बता रहे हैं। गुल पनाग ने कहा, ‘और, सार्वजनिक विरोध के लिए ‘विपक्ष से प्रेरित’ होना कब से अयोग्यता बन गया? जाहिर है, विपक्ष अहम भूमिका निभा रहा है। लोकतंत्र में विपक्ष का काम यही तो है – सरकार से सवाल करना, जनमत तैयार करना और सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह ठहराना।’

सैन्‍य अफसर की बेटी हैं गुल पनाग, करती हैं समाज सेवा

चंडीगढ़ में पैदा हुईं गुल पनाग एक सैन्‍य परिवार से हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग सेना में थे। वह ‘कर्नल शमशेर सिंह फाउंडेशन’ चलाती हैं, जो एक NGO है और जेंडर इक्वालिटी, शिक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे कई मुद्दों पर काम करता है। गुल पनाग मार्च 2014 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुई थीं। वह 2014 के आम चुनावों में चंडीगढ़ से आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार थीं। उन्हें 1,08,679 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहीं, जबकि किरण खेर ने 1,91,362 वोटों से चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने पार्टी की मुख्यधारा की राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बना ली और जून 2021 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

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