ग्वालियर: मध्य प्रदेश में ऑक्सीटोसिन के अवैध इस्तेमाल और बिक्री को रोकने के लिए 13 साल पहले दिए गए निर्देशों पर अमल न होने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने इस संबंध में दायर की गई एक अवमानना याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह इस पूरे मामले में अब तक उठाए गए कदमों की एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करे।
फल-सब्जियों और पोल्ट्री में हो रहा था खतरनाक इस्तेमाल
मूल रूप से यह जनहित याचिका एडवोकेट वीपी सिंह उर्फ विजय प्रताप सिंह राजावत द्वारा दायर की गई थी, जिसमें ऑक्सीटोसिन के अंधाधुंध और गैर-कानूनी इस्तेमाल से इंसानी सेहत पर पड़ने वाले गंभीर खतरों को उजागर किया गया था। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में स्पष्ट किया था कि इस हार्मोन का इस्तेमाल किसी भी सूरत में फल और सब्जियों का आकार या वजन बढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों की तेजी से ग्रोथ के लिए भी इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे।
- 28 जुलाई को न्यायमूर्ति अमित सेठ की अदालत ने पारित किया आदेश
- 13 साल पुराने निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर मांगी गई रिपोर्ट
- मूल जनहित याचिका एडवोकेट वीपी सिंह राजावत ने की थी दायर
- फल-सब्जियों और पोल्ट्री फार्मों में ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल पर है रोक
- केवल डॉक्टर या पशु चिकित्सक के पर्चे पर ही बिक सकता है हार्मोन
- केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है राज्य की जिम्मेदारी
- सरकारी वकील को तीन दिन के भीतर याचिका की कॉपी देने के निर्देश
- चार सप्ताह बाद तय की गई मामले की अगली सुनवाई