सतना जिला अस्पताल से सामने आया थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर 4 बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने के बाद राज्य सरकार हरकत में आई है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देश पर राज्य स्तरीय 6 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जिसे 7 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी।
जांच में सामने आया है कि ये चारों बच्चे पहले आईसीटीसी जांच में एचआईवी नेगेटिव थे, लेकिन बाद की जांच में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बच्चों की उम्र 8 से 11 साल के बीच है और वे लंबे समय से थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। ब्लड ट्रांसफ्यूजन को ही संक्रमण का मुख्य संभावित कारण माना जा रहा है।
70 से 100 बार चढ़ चुका था खून, खतरा बढ़ा
सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल के अनुसार, इन बच्चों को अब तक 70 से 100 बार तक ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जा चुका है। ऐसे मामलों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। जांच में यह भी सामने आया है कि बच्चों को सिर्फ सतना जिला अस्पताल ही नहीं, बल्कि रीवा के बिरला अस्पताल सहित अन्य जिलों से भी ब्लड सप्लाई की गई थी।
तफ्तीश में यह बात उजागर हुई है कि चारों बच्चे करीब 200 ब्लड डोनर के संपर्क में आए और 3 अलग-अलग ब्लड बैंकों के जरिए अब तक 189 यूनिट ब्लड चढ़ाया जा चुका है। अब सभी संभावित डोनरों की पहचान कर उनकी जांच की जा रही है।