भोपाल जिले में कनक, कंकाली,सफायर व ड्रीम नाम से काटी जा रही थी अवैध कॉलोनियां, चला बुलडोजर

भोपाल। जिले की नगरीय सीमा पर लगे वार्ड व पंचायतों में कृषि भूमि पर बिना किसी अनुमति के अवैध कालोनियों विकसित की जा रही हैं। जिनमें लोगों को तमाम सुविधाओं के नाम पर प्लाट बेचकर मोटी रकम ली जा रही है, लेकिन बाद में उन्हें धोखा दिया जाता है।

ऐसी ही अवैध कालोनियों बिलखिरिया इलाके में कनक,कंकाली, सफायर व ड्रीम फार्म हाउस के नाम से भूमाफिया द्वारा काटी जा रही थी। जिनकी जानकारी मिलते ही करीब 114 करोड़ रुपये कीमत की जमीन पर तन रहीं अवैध कालोनियों पर बुधवार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार ग्राम बिलखिरिया में भूमि स्वामी व माफिया द्वारा मिलकर बिना किसी अनुमति के खुलेआम अवैध विकसित कर प्लाट बेचे जा रहे हैं।

इनमें लोगों से मोटी रकम तो ली जाती है लेकिन उन्हें सुविधा के नाम पर ठगा जाता है। ऐसी सूचना मिलने पर एसडीएम हुजूर विनोद सोनकिया ने राजस्व टीम को मौके पर भेजकर जांच करवाई तो अवैध कालोनियाें में प्लाट बेचे जाने की पुष्टि हुई।

जिसके बाद राजस्व अमले ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर कनक प्रापर्टी नाम से काटी जा रही अवैध कालोनी की पांच एकड़ जमीन पर किए जा रहे अवैध निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई की है।यह जमीन संतोष अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, राजेश भदौरिया के नाम है, जिसकी कीमत करीब आठ करोड़ रुपये बताई गई है।

यह भी काट रहे थे

बिलखिरिया में राजस्व टीम ने तीन अलग-अलग अवैध कालोनियों के निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई की है।जिसमें 16 करोड़ रुपये कीमत वाली मेसर्स बीएमए सोसायटी द्वारा भागीदार मनाीष गोधा की जमीन पर ड्रीम प्रीमियम फार्म लैंड नाम से अवैध कालोनी काट प्लाट बेचे जा रहे थे।इसी तरह अरिहंत गुप्ता मेसर्स कोनक्वेर ग्रुप की जमीन पर सलमान द्वारा सफायर फार्म के नाम से, बजरंग बिल्डर्स संचालक हरिशंकर नामदेव, ब्रजेश मित्तल की जमीन पर कंकाली फार्म हाउस के नाम से अवैध कालोनी विकसित कर प्लाट बेचे जा रहे थे। दोनों जमीनों की अनुमानित कीमत 90 करोड़ रुपये बताई गई है।

शिकायतकर्ता नहीं होने से संशय

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार राजस्व अमले द्वारा लगातार अवैध कालोनियों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की जा रही है लेकिन एक भी मामले में भूमिस्वामी व अवैध कालोनाइजर पर एफआइआर दर्ज नहीं की जा रही है।इसके पीछे का कारण किसी भी शिकायतकर्ता का नहीं होना बताया जा रहा है, अधिकारियों का तर्क है कि यदि कोई शिकायत करता है तो एफआइआर की जाएगी।

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