गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कोटमीकला गांव में लगने वाले साप्ताहिक बाजार के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ग्रामीणों ने बाजार की जमीन पर अवैध कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत की है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोटमीकला का साप्ताहिक बाजार आजादी से पहले से हर मंगलवार को लगता आ रहा है। यह बाजार आसपास के 20 से अधिक गांवों के लोगों की जरूरतों को पूरा करता है और सैकड़ों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है।
ग्रामीणों के अनुसार, बाजार की शासकीय भूमि समेत पांच खसरा नंबरों की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी और निजी जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया।
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में गांव के मुख्तार अहमद अंसारी और उनके परिवार पर पटवारी, राजस्व निरीक्षक से मिलीभगत कर खसरा, नक्शा और मिसल में बदलाव कराने का आरोप लगाया गया है।
रोजी-रोटी पर पड़ सकता है असर
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाजार की जमीन पर कब्जा हो गया और बाजार उजड़ गया, तो छोटे दुकानदारों, सब्जी-फल विक्रेताओं, किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका प्रभावित होगी। कई परिवारों का जीवन-यापन इसी बाजार पर निर्भर है।
ग्रामीणों की तीन प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने कलेक्टर से तीन मांगें की हैं-
- विवादित खसरा नंबरों से जुड़े दस्तावेजों की उच्चस्तरीय फोरेंसिक जांच कराई जाए।
- कथित हेरफेर में शामिल पटवारी, राजस्व निरीक्षक और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
- जांच पूरी होने तक विवादित जमीन पर निर्माण और कब्जे की किसी भी गतिविधि पर रोक लगाई जाए तथा शासकीय भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाए।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
क्या है पूरा विवाद?
ग्रामीणों का आरोप है कि बाजार की शासकीय भूमि को निजी भूमि बताकर रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। साथ ही आसपास के परिवारों की ओर से खरीदी गई जमीन को नक्शे से हटाने की कोशिश की गई।
विवादित खसरों में 110/8, 110/9 और 110/10 शामिल हैं, जिन्हें खरीदी गई जमीन बताकर नक्शे से विलोपित करने का आरोप है। वहीं खसरा नंबर 111/1, जो यूनाइटेड क्रिश्चियन सोसायटी की भूमि बताई जा रही है।
उस पर भी कब्जे का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा खसरा नंबर 111/11 की आड़ में भी सोसायटी की जमीन पर दावा कर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया गया है।
फिलहाल ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।