तेल अवीव: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए ‘मक्का समझौते’ के बाद इजरायल का मानना है कि इस समझौते के बाद उसके भारत से संबंध और मजबूत होंगे। दरअसल पिछले हफ्ते गुरुवार को एक ऐसी घटना घटी जो अचानक से घटती दिखी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि उनके पास प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का फोन आया था और दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के मौजूदा हालातों पर बात की गई है।
मक्का समझौते से एक दिन पहले मोदी-नेतन्याहू में बातचीत
हर्ब कीनोन ने लिखा है कि पीएम मोदी और नेतन्याहू में अचानक टेलीफोन पर क्यों बात हुई होगी वो अगले दिन समझ में आ गई जब शुक्रवार को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने आपसी रक्षा के लिए एक बड़ा समझौता किया। इसे ‘मक्का पैक्ट’ कहा गया क्योंकि इसे मक्का शहर में ही अंतिम रूप दिया गया था। इसीलिए यह सोचना मुश्किल है कि नेतन्याहू और मोदी की बातचीत में इस समझौते पर चर्चा नहीं हुई होगी। भले ही जनता ने शुक्रवार को ही इस समझौते पर हस्ताक्षर होते देखे लेकिन यरूशलेम और नई दिल्ली को निश्चित रूप से पता रहा होगा कि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है
उन्होंने लिखा है कि ‘मक्का में हुई घोषणा निश्चित रूप से उस साझेदारी को पूरी गति से आगे बढ़ाने में मदद करेगी। दुनिया ऐसे ही काम करती है। कार्यों से प्रतिक्रियाएं होती हैं जो बदले में नई व्यवस्थाओं को जन्म देती हैं।’
पाकिस्तान, सऊदी, तुर्की डिफेंस पैक्ट के दूरगामी होंगे असर
शुक्रवार को इस समझौते पर दस्तखत होने के बाद जिसकी पुष्टि करते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इसमें NATO जैसा ‘आर्टिकल 5’ क्लॉज शामिल है जिसका मतलब है कि किसी एक पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा, ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने इस पल का सटीक वर्णन करते हुए लिखा है ‘जब कोई महाशक्ति लड़खड़ाती है तो क्षेत्रीय ताकतें अपने लिए इंतजाम करने लगती हैं।’ इसके कहने का मतलब है कि अमेरिका लड़खड़ा रहा है और मध्य पूर्व के देश अपनी सुरक्षा के लिए नये इंतजाम कर रहे हैं।