वॉशिंगटन: पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लेकर लगातार रो रहा है। पाकिस्तान के नेता और डिप्लोमेट्स लगातार इस मामले को इंटरनेशनल बनाने में जुटे हैं जबकि भारत ने साफ शब्दों में कह रखा है ‘खून और पानी साथ नहीं बह सकते।’ अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रिजवान सईद शेख ने ‘न्यूज वीक’ की वेबसाइट के लिए एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने भारत पर कई तरह के आरोप लगाने की कोशिश की है। इस लेख में उन्होंने अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा की तरफ से 1 अगस्त को लिखे गये लेख को काउंटर करने की कोशिश की है जिसमें भारतीय दूत ने पाकिस्तान की की पोल खोली थी।
राजदूत रिजवान सईद शेख ने लिखा है ‘अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने सिंधु जल संधि (IWT) को एक ऐसी असमान व्यवस्था के तौर पर पेश करने की कोशिश की है जिसमें अनुचित रियायतें दी गई थीं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने पश्चिमी नदियों पर भारत के जलविद्युत विकास में बाधा डाली है। यह लेख साफ तौर पर मनगढ़ंत बातें करने और भ्रम फैलाने की परंपरा का पालन करते हुए संधि के इतिहास, संरचना और उद्देश्य के बारे में गलत जानकारी देता है।’
भारत के कड़े रुख पर पाकिस्तानी राजदूत की दलील
उन्होंने लिखा है ‘अप्रैल 2025 में संधि को स्थगित रखने की गैर-कानूनी घोषणा के बाद से भारत लगातार इस बात को दोहरा रहा है। ऐसा लगता है कि इसका मकसद एकतरफा कार्रवाई को पीछे की तारीख से सही ठहराना है जिसका न तो संधि में और न ही अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार है।’
पाकिस्तानी राजदूत ने लिखा है ‘IWT एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है जो वर्ल्ड बैंक की मदद से दशकों तक चली बातचीत के बाद 1960 में हुआ था। यह न तो भारत की उदारता का काम था और न ही पाकिस्तान को दी गई कोई रियायत। यह सोच-समझकर किया गया एक कानूनी समझौता था जिसका मकसद ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) में मनमाने फैसलों की जगह स्पष्ट और बाध्यकारी अधिकारों और दायित्वों को लाना था ताकि सिंधु नदी प्रणाली के प्रबंधन में निश्चितता, पूर्वानुमान और स्थिरता बनी रहे।’
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में रूकावट पर क्या बोला पाकिस्तान
पाकिस्तानी राजदूत ने लिखा है ‘यह दावा भी गलत है कि पाकिस्तान ने भारत के हाइड्रोपावर डेवलपमेंट में रुकावट डालने की कोशिश की है। संधि में साफ तौर पर भारत को पश्चिमी नदियों पर ‘रन-ऑफ-रिवर’ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट बनाने की इजाजत दी गई है बशर्ते वे संधि में बताए गए डिजाइन और ऑपरेशन के नियमों का पालन करें।’ उन्होंने लिखा है ‘कानूनी स्थिति साफ है। IWT में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी भी पक्ष को इसे एकतरफा रूप से रोकने, स्थगित करने या खत्म करने की अनुमति देता हो। अनुच्छेद XII में कहा गया है कि IWT तब तक लागू रहेगा जब तक कि दोनों सरकारों के बीच विधिवत रूप से पुष्टि की गई संधि के माध्यम से इसे समाप्त न कर दिया जाए।’