स्वच्छ सर्वेक्षण में इंदौर-जबलपुर-भोपाल ने बचाई प्रदेश की साख, केंद्रीय सर्वेक्षण टीम भोपाल में वार्डों और स्कूलों का करेगी निरीक्षण

भोपाल। स्वच्छ सर्वेक्षण में नागरिक सहभागिता को लेकर मध्य प्रदेश की तस्वीर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। एक ओर इंदौर, जबलपुर और भोपाल जैसे बड़े शहर लाखों नागरिकों को स्वच्छता अभियान से जोड़ने में सफल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई नगरीय निकायों में नागरिक फीडबैक की स्थिति बेहद खराब है।
इससे स्वच्छ सर्वेक्षण में मिलने वाले एक हजार अंकों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
बुधवार दोपहर तक देशभर में 87.68 लाख नागरिक फीडबैक दर्ज किए गए, जिनमें मध्य प्रदेश 22.70 लाख फीडबैक के साथ देश में दूसरे स्थान पर है।
पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश है, जहां 38 लाख से अधिक नागरिक फीडबैक दर्ज किए गए हैं।

सिर्फ चार शहर पार कर सके एक लाख का आंकड़ा

सिटीजन फीडबैक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 192 नगरीय निकायों में केवल इंदौर, जबलपुर, भोपाल और उज्जैन ही एक लाख से अधिक नागरिक फीडबैक जुटा सके हैं।
इसके विपरीत 66 नगरीय निकाय ऐसे हैं, जो दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। वहीं 46 नगरीय निकायों में सिर्फ एक-एक नागरिक ने ही स्वच्छता एप पर प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। इनमें अमरकंटक, दमोह, इटारसी, रेहटी, सिवनी और सीधी जैसे शहर शामिल हैं।
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