वॉशिंगटन: सऊदी अरब ने परमाणु हथियार बनाने के अपने इरादे को अभी तक छोड़ा नहीं है। खुफिया दस्तावेजों के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने इसका खुलासा किया है। ये रिपोर्ट अमेरिकी संसद को सौंपा गया है जिसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसी का यह आकलन शामिल है कि सऊदी अरब ने परमाणु हथियार कार्यक्रम विकसित करने के विकल्प को खारिज नहीं किया है। वॉशिंगटन पोस्ट ने लीक दस्तावेज का खुलासा किया है।
वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया है कि खुफिया जानकारी से मिली चिंताजनक बातों ने सऊदी अरब को नागरिक परमाणु कार्यक्रम शुरू करने में मदद करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समझौते को लेकर कुछ अमेरिकी सांसदों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। उन्हें डर है कि इससे परमाणु हथियार बन सकते हैं और अस्थिर मध्य पूर्व में हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है।
सऊदी की परमाणु महात्वाकांक्षा को लेकर 5 बड़ी बातें क्या है?
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सऊदी अरब ने भविष्य में अपने लिए परमाणु हथियार विकसित करने का विकल्प पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
यह रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब ट्रंप प्रशासन सऊदी अरब के साथ अरबों डॉलर की ‘नागरिक परमाणु संधि’ कर रहा है। अमेरिकी सांसदों को डर है कि इससे सऊदी अरब को परमाणु हथियार बनाने का जरिया मिल सकता है।
समझौते में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के ‘अतिरिक्त प्रोटोकॉल’ को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। विशेषज्ञों की चिंता है कि इससे यह जांचना नामुमकिन हो जाएगा कि सऊदी अरब किसी गुप्त ठिकाने पर परमाणु हथियार बना रहा है या नहीं।
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 2018 में साफ कहा था कि अगर ईरान परमाणु बम बनाता है तो सऊदी भी तुरंत बनाएगा। अमेरिकी सांसदों को डर है कि इस डील से पूरे पश्चिम एशिया में विनाशकारी हथियारों की होड़ शुरू हो जाएगी।
कैसे सऊदी परमाणु डील कैंसिल कर सकते हैं अमेरिकी सांसद?
जुलाई में सऊदी अरब के साथ ‘नागरिक-परमाणु डील’ की घोषणा करते हुए ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि यह ‘परमाणु सुरक्षा, हिफाजत और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के ऊंचे मानकों को बनाए रखकर और सिविल परमाणु टेक्नोलॉजी में अमेरिका की प्रतिस्पर्धी बढ़त को मजबूत करके अमेरिका और क्षेत्रीय सुरक्षा को आगे बढ़ाएगा।’ अमेरिका के ज्यादातर सांसदों ने इसी बात को लेकर चिंता जताई है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसद इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि इस डील से सऊदी अरब में यूरेनियम को लगभग 20 प्रतिशत तक एनरिच करने का रास्ता खुल सकता है जिससे यह डर बढ़ रहा है कि कुछ परमाणु सामग्री का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। कांग्रेस में 90 दिनों की समीक्षा प्रक्रिया चल रही है और अगर सांसद पर्याप्त समर्थन जुटा पाते हैं तो वे इस डील को रोकने के लिए कानून पारित कर सकते हैं।’