भोपाल । जिले के ईटखेड़ी क्षेत्र स्थित राताताल के रोजीवे गांव में अवैध उत्खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। 15 एकड़ भूमि पर स्वीकृत खोदाई की आड़ में बड़े पैमाने पर कोपरा निकालकर बेचने के आरोपों के बीच जिला खनिज विभाग की जांच पर सवाल उठ रहे हैं।कलेक्टर प्रियंक मिश्रा द्वारा तीसरी बार जांच के संकेत दिए जाने के बावजूद जिला खनिज अधिकारी ने लिखित निर्देश नहीं मिलने का हवाला देते हुए नई जांच कराने से इंकार कर दिया है।
ईटखेड़ी अवैध उत्खनन मामला: भोपाल कलेक्टर के संकेत के बावजूद खनिज अधिकारी का इंकार, बोले- ‘लिखित आदेश मिला तो ही होगी तीसरी जांच’
राताताल के रोजीवे गांव में 15 एकड़ जमीन पर 40 हजार घनमीटर खुदाई की अनुमति लेकर जमीन मालिक हरिचरण व कोपरा निकालने वाले शैलेंद्र भदौरिया और शेखर पंवार द्वारा करीब 600 डंपर कोपरा बाजार में बेचने का आरोप है। मामले में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की फटकार के बाद जिला खनिज अधिकारी मेहताब सिंह रावत ने खनिज निरीक्षक सुचि माथुर से दो बार जांच कराई, लेकिन दोनों जांच रिपोर्टों पर सवाल उठने के बाद भी तीसरी जांच अब तक नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार, पहली जांच में केवल अनुमति की शर्तों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया और अवैध उत्खनन का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। मौके पर मौजूद 12 डंपरों को भी जब्त नहीं किया गया। इसके बाद कलेक्टर की नाराजगी के चलते दूसरी बार जांच कराई गई, जिसमें 40 लाख 40 हजार रुपये की पेनाल्टी प्रस्तावित की गई। हालांकि फाइल कलेक्टर के पास पहुंचने पर उन्होंने पेनॉल्टी राशि कम बताते हुए मामले की दोबारा समीक्षा और तीसरी जांच के संकेत दिए।
बताया जा रहा है कि मामले में करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के कोपरा के अवैध रूप से निकाले जाने की आशंका जताई जा रही है। इस संबंध में एसडीएम ने भी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। दूसरी ओर, जांच प्रतिवेदन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और आरोप लग रहे हैं कि जांच में अवैध उत्खनन की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह सामने नहीं लाया गया।
राताताल क्षेत्र में अवैध खनन का यह पहला मामला नहीं है। करीब एक वर्ष पहले खनिज विभाग ने इसी क्षेत्र में अवैध उत्खनन करने वालों पर चार करोड़ 76 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। उस कार्रवाई के दौरान एक पोकलेन मशीन और नौ डंपर जब्त किए गए थे। कार्रवाई पुलिस ने की थी, जबकि खनिज विभाग को पहले से गतिविधियों की जानकारी होने के आरोप लगे थे। उस मामले में शेखर पंवार, दशरथ यादव और जीवन सिंह राठौर को आरोपी बनाया गया था।
इसी प्रकार हरिचरण के खेत पर भी नायब तहसीलदार की टीम ने अवैध उत्खनन पकड़ा था। इसके बावजूद खनिज निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत दोनों जांच प्रतिवेदनों पर लीपापोती के आरोप लग रहे हैं।