भोपाल। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच ने बाजार में बिक रहे घी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग द्वारा लिए गए गोवर्धन प्योर काउ घी, द्वारकेश घी और धौलपुर फ्रेश प्रीमियम क्वालिटी देसी घी के नमूने एफएसएसएआइ के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
भोपाल में नामी ब्रांडेड घी के नमूनों में बड़ी गड़बड़ी: FSSAI मानकों पर खरे नहीं उतरे गोवर्धन, द्वारकेश और धौलपुर फ्रेश
अधिकृत प्रयोगशाला रिपोर्ट में तीनों नमूनों में अलग-अलग स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की तैयारी है।
जांच में द्वारकेश घी के नमूने में बीटा-सिटोस्टेराल की मात्रा 2.38 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम मिली, जबकि शुद्ध घी में इसकी मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। यह वनस्पति तेल या वनस्पति वसा के मिश्रण का संकेत माना जाता है।
इसके अलावा बीआर रीडिंग, पोलेंस्के वैल्यू, आयोडीन वैल्यू और सैपोनिफिकेशन वैल्यू भी निर्धारित मानकों से अलग मिली।वहीं गोवर्धन प्योर काउ घी के नमूने में सीसा (लीड) की मात्रा ने चिंता बढ़ाई है।
जांच में सीसा 0.241 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम मिला, जबकि निर्धारित सीमा केवल 0.02 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है। यानी सीसे की मात्रा करीब 12 गुना अधिक पाई गई। साथ ही फैटी एसिड प्रोफाइल और आयोडीन वैल्यू में भी बदलाव मिला।
धौलपुर फ्रेश प्रीमियम क्वालिटी देसी घी के नमूने में बाडाइन टेस्ट पाजिटिव आया, जबकि शुद्ध घी में यह नेगेटिव होना चाहिए। यह तिल के तेल की मौजूदगी का संकेत देता है।
वहीं सीसे की मात्रा 0.296 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम मिली, जो तय सीमा से करीब 14.8 गुना अधिक है।