मध्यप्रदेश में चल रही प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) के केंद्रीय पुनर्वास रजिस्टर (CRR) प्रमाणपत्र को लेकर नया विवाद सामने आया है। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 14 हजार पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की दोबारा जांच के दौरान करीब 600 ऐसे अभ्यर्थी मिले, जिन्होंने पहले 5 प्रतिशत अतिरिक्त अंक का दावा सीआरआर प्रमाणपत्र के आधार पर किया था, लेकिन स्क्रूटनी के समय संबंधित प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। ऐसे अभ्यर्थियों की नियुक्ति फिलहाल रोक दी गई है।
कोर्ट में पहुंचा मामला, नए अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग पर भी संशय
मामला अब अदालत में विचाराधीन है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संबंधित अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके आवेदन के साथ सीआरआर प्रमाणपत्र गलती से संलग्न हो गया था। ऐसे में अब अंतिम स्थिति अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी। वहीं, जिन नए अभ्यर्थियों को इनके स्थान पर मौका मिल सकता है, उनकी नियुक्ति को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, सीआरआर विशेष शिक्षा और दिव्यांग पुनर्वास से जुड़े पेशेवरों के लिए अनिवार्य पंजीकरण प्रमाणपत्र है, जो उन्हें इस क्षेत्र में कार्य करने की कानूनी मान्यता प्रदान करता है।
जुलाई में नियुक्ति पत्र देने की तैयारी, ई-अटेंडेंस पर भी सख्ती
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने बताया कि विभाग की कोशिश जुलाई के भीतर ही नियुक्ति पत्र जारी करने की है ताकि नए शिक्षक चालू शिक्षण सत्र में स्कूलों में कार्यभार संभाल सकें। उन्होंने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति किसी उचित कारण से बाद में होती है तो उसकी वरिष्ठता पर असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि विभाग के ई-अटेंडेंस सिस्टम में लगातार सुधार किया जा रहा है। यदि तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो रही है तो उसे ठीक किया जाएगा, लेकिन जानबूझकर ई-अटेंडेंस नहीं लगाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ वेतन रोकने सहित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अटैचमेंट वाले शिक्षकों को मूल पद पर लौटने के निर्देश
विभाग ने अटैचमेंट पर कार्यरत शिक्षकों को भी मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भोपाल में 92 शिक्षक अटैचमेंट से मुक्त किए जा चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी हजारों शिक्षक अभी अटैचमेंट पर हैं। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाएगा। यदि कोई शिक्षक निर्देशों के बावजूद वापस नहीं लौटता है तो उसका वेतन रोका जाएगा। साथ ही ऐसे मामलों में संबंधित संकुल प्राचार्य के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।